One Response

Page 1 of 1
  1. avatar
    घिंघारु July 26, 2010 at 12:25 PM |

    हाई, इसमें अफसोस की बात क्या ठैरी महाराज?
    उत्तराखण्ड बना ही उनके अनुयाईयों के लिये है, हरेले से जब खुद ही मुंह मोड़ोगे, नाक सिकोड़ोगे तो ऐसा तो होना ही है। यह उत्तराखण्ड का दुर्भाग्य है कि उत्तराखण्ड आन्दोलन में मुंह बिचकाये, चुपचाप रहने वाले आज आन्दोलनकारी हो गये और वास्तविक आन्दोलनकारी किनारे है।

    Reply

Leave a Reply

%d bloggers like this: