2 Responses

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    पिछड़ा उत्तराखण्डी May 29, 2012 at 1:27 PM |

    यदि २००० कि संशोधित आरक्षण सूची में लोहार बढ़ई ताम्रकार शिल्पकार में समाहित हैं तो पिछड़ी जाति कि सूची में इनका नाम क्यों रखा गया है? वास्तविकता ये है कि अनुसूचित जाति का आरक्षण पिछडो को दिया जा रहा है और क्षत्रिय और ब्राह्मण पिछड़ी जाति का आरक्षण खा रहे हैं उत्तराखंड में

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    VIJAY SINGH August 20, 2017 at 1:47 PM |

    लेखक ने बड़ी चतुराई से ये लेख लिखा है, कोलियो का नाम लिए बिना कोलियो पर कटाक्ष किया गया है। परन्तु कोली का नाम लिखने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। जबकि जीन भी समुदायों का नाम लिखा गया है, उनसे कोलियो की संख्या ज्यादा नहीं तो कम भी नहीं होगी।

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