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    घिंघारु April 13, 2010 at 11:42 AM |

    सर जी, बीस साल तो बहुत दूर हैं, अभी यह हालात है कि सदानीरा नयार नदी के ऊपर बसे इस शहर की जलापूर्ति टैंकरों से हो रही है और घर का एक सदस्य पानी भरने के लिये दिन भर सड़क के किनारे टैंकर के आने का इंतजार करता दिखता है। बीस साल बाद यह होगा कि इस शहर में सिर्फ सरकारी कर्मचारी ही मजबूरी में रहेंगे और बाकी सब पलायन कर जायेंगे।
    पेयजल देने के नाम पर लाखों का कर्जा लेने वाली सरकार न जाने कब इस शहर के पेयजल की समस्या दूर करने के लिये एकमात्र उपाय लिफ्ट योजना के बारे में सोचेगी। फिलहाल तो उनका जल संस्थान और निगम टैंकरों के डीजल का हिसाब ही लाग-बुक में दर्ज करने में लगा है।

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