‘पंचेश्वर बाँध’ से ‘रस्यूना’ ने क्या कहा?

-नैनीताल समाचार डेस्क

पढ़ें वह पत्र जो 1 मेगावाॅट परियोजना के ग्रामीण डायरेक्टर ने 5040 मेगावाॅट के पंचेश्वर बांध के खिलाफ लिखा।
Rasyuna Village

रस्यूना गांव

सेवा में,
सचिव,
उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
एवं
समस्त आयोजनकर्ता,
पर्यावरण जन सुनवाई, धौलादेवी
पंचेश्वर बहु-उद्देश्यीय विकास परियोजना

विषयः आपके द्वारा प्रस्तावित पंचेश्वर बांध की 116 किमी की झील रस्यूना गांव के पास हमारे द्वारा बनाई जा रही 1 मेगावाॅट की विद्युत परियोजना को डुबा देगी। यह परियोजना हमारे गांव के साथ ही सम्पूर्ण उत्तराखंड के ग्रामीण समाज के सुनहरे भविष्य का सपना है। हम आपके विनाशकारी बांध का विरोध करते हैं।

महोदय,
2011 में सरयू नदी किनारे बसे रस्यूना और आसपास के गांवों के लोगों ने मिलकर, ‘सरयू हाइड्रोइलैक्ट्रिक पावर प्रोड्यूसर्स कंपनी लिमिटेड’ नाम से एक प्रोड्यूसर्स कंपनी रजिस्टर कराई थी। इस कंपनी के ज़रिए हम रस्यूना गांव के पास बहने वाली सरयू नदी में 1 मेगावाॅट की उत्पादन क्षमता वाली जल विद्युत परियोजना बनाना चाहते हैं। परियोजना के बजट के मुताबिक यह परियोजना रस्यूना और आसपास के गांवों के 100 परिवारों को 12000 रुपये प्रतिमाह की स्थाई आमदनी मुहैया कराएगी जो कि गांवों से पलायन को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। इस परियोजना के मालिक (शेयर धारक) रस्यूना और आसपास के गांवों के आम लोग हैं।

महोदय पहाड़ के गांवों के स्थाई और स्वावलंबी विकास की हमारी यह महत्वाकांक्षी योजना आपके द्वारा बनाई जा रही पंचेश्वर बांध की विशाल झील के चपेट में आकर डूब जाएगी। पहाड़ी गांवों, इसके समाज, संस्कृति, सभ्यता, वनस्पति, जैव विविधता और समूचे पर्यावरण को डुबो देने वाली आपकी यह परियोजना विकेंद्रीकृत विकास के हमारे सपने और मेहनत को डुबो देगी। हम आपकी इस परियोजना का विरोध करते हैं और इस जन सुनवाई के माध्यम से हमारी आपसे और सरकार से निम्नलिखित मांगें हैं-

हमारी मांगें-

  • पंचेश्वर बांध को तुरंत रद्द किया जाए। यह हमारे समाज, संस्कृति, सभ्यता, वनस्पति, जैव विविधता और समूचे पर्यावरण के विनाश की परियोजना है।
  • यह जनसुनवाई ईआईए नोटिफिकेशन 2006 (संशोधन 2009) का उल्लंघन है क्योंकि समय से इसकी सूचना प्रभावित इलाकों में नहीं प्रसारित की गई जिसके चलते ग्रामीणों को इसमें भागीदारी का समुचित अवसर नहीं मिला है। इसे रद्द करें और दुबारा 2 महीने बाद आयोजित करें।
  • विकास के नाम पर पहाड़ के समाज को गुमराह करना बंद करें। पहाड़ के 134 से अधिक गांवों को डुबोकर, तबाह कर, विकास नहीं आ सकता।
  • रस्यूना में सरयू नदी पर हमारे द्वारा बनाई जा रही 1 मेगावाॅट की परियोजना ग्रामीण उत्तराखंड के स्थाई विकास की परियोजना है। यह लोगों को रोजगार देने और पहाड़ से पलायन को रोकने के लिए बनाई जा रही है। आप पंचेश्वर जैसी विनाशकारी परियोजना के बजाय, पूरे उत्तराखंड में इस तरह की 1 मेगावाॅट की परियोजनाओं को सहयोग देकर उत्तराखंड के असली विकास में भागीदार बनें।
  • ‘दिल्ली’ और दिल्ली जैसे शहरों के विकास को ‘देश का विकास’ कहना बंद करें। ‘‘भारत गांवों में बसता है।’’ गांधी जी के इस कथन के मर्म को समझें और गांवों को डुबोने वाली परियोजनाओं के बजाय गांवों को उबारने वाली परियोजनाओं की दिशा में काम करें।
  • यदि आपको ऊर्जा की वास्तव में ज़रूरत है तो, आप 5040 मेगावाॅट की एक विनाशकारी परियोजना बनाने के बजाय, उत्तराखंड भर की 17 बड़ी नदियों और उनकी अनेक सहायक नदियों में 1-1 मेगावाॅट की 5040 परियोजनाएं बनांए और उनकी मिल्कियत स्थानीय समुदायों (ग्राम सभाओं/प्रोड्यूसर्स कंपनियों) को दे दें। यह उत्तराखंड के ग्रामीण समाज को डुबोने के बजाय उनको स्थाई और स्वावलंबी विकास देने का काम करेगा।
  • सरकारी कार्यक्रमों में पलायन का रोना बंद करें। पलायन केवल तभी रुक सकता है जबकि उत्तराखंड के ग्रामीण समाज में रोजगार, स्वास्थ्य एवं शिक्षा सुविधाएं, सड़क व ग्रामीण उत्पादों के लिए मंडियां मुहैया कराई जाएं। हमारी यह परियोजना यह काम करेगी जबकि आपकी विशालकाय विनाशकारी परियोजना पलायन और बेरोजगारी को बढ़ाएगी।
    आपकी यह परियोजना हमारे संवेदनशील पहाड़ के समूचे पर्यावरण के लिहाज से भी खतरनाक है। हम इसका विरोध करते हैं।

महोदय इस जन-सुनवाई में पंचेश्वर बांध की इस विनाशकारी परियोजना का हम विरोध करते हैं। जनता की सुनी जाय और इस परियोजना पहाड़ और पहाड़ के समुदाय के हितों के लिए रद्द किया जाए।

दिनांक- 17.08.2017

(बसंत सिंह खनी)
‘सरयू हाइड्रोइलैक्ट्रिक पावर प्रोड्यूसर्स कंपनी लिमिटेड’
बजेला, धौलादेवी, अल्मोड़ा

Basant Khani

धौलादेवी जनसुनवाई में अपनी बात रखते ‘सरयू हाइड्रो​इलैक्ट्रिक पावर प्रोड्यूसर्स कंपनी लिमिटेड’ के निदेशक बसंत खनी.

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