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    JAY SINGH RAWAT June 13, 2012 at 9:49 AM |

    ललिता चंदोला वैष्णव का निधन उत्तराखंड के लिए एक बहुत बड़ी बौद्धिक क्षति है. उनकी ससुराल नंदप्रयाग में थी और मेरी बहिन की ससुराल भी वहीँ होने के कारण मैं उन्हें दीदी बोलता था. उनके कार्य दुनियां के सामने हैं. खास कर उन्होंने विश्वम्भर दत्त चंदोला शोध संस्थान की स्थापना कर प्रदेश के शोधार्थियों के लिए एक बहुत बड़ा प्लेटफोर्म बनाया है. लेकिन बहुत कम लोगों को पता होगा कि उस संस्थान के ११ सस्थापक सदस्य कोंन थे. उन सदस्यों में कैप्टन शूरवीर सिंह पंवार, परिपूर्ण नन्द पैन्यूली, राधा कृष्ण कुकरेती, कर्नल सकलानी, देवेन्द्र भसीन और मैं जयसिंह रावत भी शामिल थे. उस संस्थान के अध्यक्ष पैन्यूली जी और सचिव कुकरेती जी बनाये गए.दौढ़भाग के लिए मुझे सहायक सचिव बनाया गया. उस संस्थान के पंजीकरण के लिए मैंने और भसीन साहब ने रजिस्ट्रार ऑफिस के न जाने कितने चक्कर लगाये होंगे. बहरहाल संस्था बनी और काम भी शुरू हुवा . संस्थान हर साल विश्वम्भर दत्त चंदोला जी की याद में कार्यक्रम करता था. लेकिन मुझे बाद में लगा की मेरा काम केवल दरी बिछाना, कुर्सियां लगाना और चाय पिलाना ही है मैं किनारे हो गया. भसीन साहब गैर गढ़वाली थे इसलिए वह पहले ही किनारे हो गए थे. मई चाहता हूँ की आज के धांसू पत्रकार और संस्थान के कर्ताधर्ता संस्थान के पंजीकरण के कागजात भी देखें. ताकि उन्हें संस्थापकों के बारे में भी जानकारी हो.

    जय सिंह रावत
    9412324999

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