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    sushma March 4, 2011 at 10:44 PM |

    गिर्दा की याद करती हूँ तो एक दफे उन्हें धूसिया दामाई के प्रोग्राम में ९६-९७ में मंच पर देखा था.गिर्दा को हमने भी बहुत कम समय जाना. तीन चार दिन बस … पर हमेशा अपने से रहेंगे स्मृति में. गिर्दा का यूं जाना अब तक मन नहीं मानता.

    सादर
    सुषमा

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