वे सब कैद कर लिए जायेंगे

Ve sab kaid kar liye jayengeवे सब कैद कर लिए जायेंगे
जो मेरे प्रिय हैं, मित्र हैं.
आवारा हवाएँ, ख्वाहिशमंद परिंदे, स्वच्छंद नदियाँ,
आकाश जीतती चोटियाँ
और सबसे ज्यादा ‘आजाद ख्याल’।

जिन जहरीली हवाओं के बीच साँस लेने को
हम हैं अभिशप्त. मनुष्य बन सकने की
न्यूनतम आजादी के अभाव में
रेंग रहे हैं विवेकशून्य कीड़े की तरह।

और हुकूमतें,
मदमस्त झूमती उल्लास में मना रही हैं जश्न

रक्त के प्याले तैर रहे हैं हवाओं में
जिनका जहरीला नशा
दुनिया की किसी भी शराब से गहरा है.
आलीशान बर्तनों में सजा है मानव गोश्त
जिसे नोचा गया है,
थर्ड डिग्री में भूना गया है बारूद में।

वे जो शामिल हैं इस जश्न में
उन्हें यही गोश्त पसंद है.
वे जो शामिल हैं इस जश्न में
उन्हें नशा ‘रक्त के प्यालों’ से ही चढ़ता है.
वे जो शामिल हैं इस जश्न में,
वे मानवता के खिलाफ हर अपराध में भी शामिल हैं।

यह जो कुछ भी हो रहा है
हमारे चारों ओर
इसके बचे रहने की एक ही शर्त है।
मेरे सभी प्रियजनों की गिरफ्तारियाँ
आवारा हवाएँ, ख्वाहिशमंद परिंदे, स्वच्छंद नदियाँ,
आकाश जीतती चोटियाँ
और आजाद ख्याल,
ये सब गिरफ्तार कर लिए जायेंगे
और होगा कुछों का फर्जी एनकाउन्टर

इस देश में गहरे से लागू
एक अदृश्य संविधान
बाहर या जिन्दा रहने की इजाजत सिर्फ उन्हें देता है
जो गर्दन झुका, महज दाना चुगें,
वो भी अगर मिले कभी तो, वरना तलाशते रहें उसे।
उस ओर देखें भी नहीं,
जहाँ ढेर लगा है,
और सदियों से बटोरा जा रहा है उसे।

पुलिस तैनात है
जो गर्दन उठाई तो।
फौज तैयार है
जो उस ओर देखा तो।
मैं जानता हूँ कि इतनी सपाट बात
इससे पहले मैंने कविता में कभी नहीं कही।
लेकिन मैं यह भी जानता हूँ कि
इतनी सटीक बात भी
इससे पहले नहीं कही कभी,
कविता में मैंने।

वे सब कैद कर लिए जायेंगे
जो मेरे प्रिय हैं, मित्र हैं.
आवारा हवाएँ, ख्वाहिशमंद परिंदे, स्वच्छंद नदियाँ,
आकाश जीतती चोटियाँ और सबसे ज्यादा ‘आजाद ख्याल’

रोहित जोशी

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