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    sunita July 5, 2012 at 11:18 PM |

    ओह्ह्ह…बहुत मार्मिक लिखा है सर..रिजवी साहब पे लिखा भी ऐसे ही जा सकता है….उनकी सेवानिवृति की खबर अभी ही पढ़ रही,,,,मैं तो पोस्ट आफिस से पोस्टकार्ड खरीद लायी थी,आपके अनुरोध पर मैं फरमाईश भेजने ले किये….रिजवी साहब के महफ़िल व आपके अनुरोध के इंतजार मैं कब हप्ता बीत जाता थाआभास ही न होता…अल्मोडा कालेज का कोइ भी स्टूडेंट भला अपने जीवन मैं रिजवी साहब को कैसे भुला सकता है….
    आप ही के एक कार्यक्रम मैं जिसमें असगर वजाहत जी आये थे, मैं रिजवी जी से पहली बार मिलने का मौका मिला था उस दिन जाना की वह तो सामाजिक सरोकारों वाले व्यक्ति भी हैं……..

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