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    V.K. Joshi November 30, 2010 at 10:21 PM |

    अल्मोड़ा, नैनीताल, मसूरी सभी नगर आबादी के बोझ से दबे जा रहे हैं. रिहायशी जमीन की कमी के कारण लोगों ने जहाँ जगह देखी मकान बनाने शुरू कर दिए. पर्वतीय ढलानों की धारक क्षमता कितनी है इसकी जरूरत लोगों ने तो नहीं समझी पर शायद सरकार ने भी इस बात को नज़रंदाज़ कर दिया. पहाड़ में जब बारिश होती है तो पानी अंदर चला जाता है. जब यह पानी बाहर आना चाहता है ओ वह चट्टानों पर दबाव बनाता है और जहाँ भी कमजोर चट्टान मिलती हैं वहाँ से बाहर आ जाता है. इसलिए सबसे अधिक जरूरी है घर के पीची और साईड की दीवारों में ‘वीप होल्स’ बनाना, साथ में पानी की निकासी का उचित प्रबंध और प्रबंधन. अन्यथा लोग इसी प्रकार पिसते रहेंगे अपने हे घरों के मलबे में.

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