3 Responses

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    नवीन बगौली February 9, 2012 at 1:10 PM |

    नैनीताल समाचार के संपादक को मान्यता मिलना, बधाई की बात तो है ही। सरकारी तंत्र को आई इतने बरस बाद शर्म। इसमें एक लेकिन, भी है, इसे यो भी कहा जा सकता है- जैसे यह जिद्दी सरकारी तंत्र की हार है। उस सरकारी तंत्र की जो कि समाचार के प्रकाशित होने के दिन से आज तक पूरी तरह समाचार की रपटों को पचा पाने की कूबत नहीं रखता था। खैर इस तंत्र को भी अब लगने लगा होगा कि ये बज्जरकांठी हैं, मानने वाले कहां हैं, चाहे कैसे ही परेशान कर लो। बात तो कुछ है जो हस्ती मिटती नहीं हमारी, या इसे यो भी कहा जा सकता है कि तमाम कारनामे दिखाने के बाद खुद ही ससुरों का शर्म आने लगी होगी, कि पिछले दो एक वर्ष के नए, आए-गए और फर्जी अखबार के संपादकों को तो मान्यता रेवड़ी की तरह बांट दी गई और नैनीताल समाचार जो पिछले तीस-पैतीस वर्षों से छप रहा है और वह भी लालफीताशाहों की छाती पर मूंग दलते हुए, उसे नहीं मिली। वैसे हमें सरकारी मान्यता चाहिए क्या थी, जनता की मान्यता तो हमें कब की मिल चुकी। चलों इस मान्यता को भी मान लिया जाए तो कोई बुराई नहीं। मेरा सुझाव है कि इस मान्यता मिलने के उपलक्ष्य में इस प्रकार का आयोजन अखबार के भीतर ही किया जाए जिससे इन सरकारी तंत्र को संचालित करने वालों को शर्म आए, या खड़ी बोली में इसे चिरोड़ी लगाने जैसा कुछ किया जाए, जो ससुरों को आगे के लिए सबक दिलाता हो बस इतना ही। बधाई, देर आयद दुरुस्त आयद…

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    Prem Arora February 9, 2012 at 3:22 PM |

    राजीव दा सादर प्रणाम
    आपको बहुत बहुत बधाई की आपको मान्यता मिल गयी है…में भी पिछले 10 साल से लगा हुआ हूँ लगता है की अगले 10 साल में मुझे भी मान्यता मिल जायेगी. वैसे जिनको लिखना सिखाया उन सभी को मान्यता मिल गयी है…पर अपने से किसी की चमचागिरी नहीं हो सकती ऐसे में मान्यता तो दूर कुछ भी उम्मीद करना बेवकूफी होगी….इसी लिए अपने काम धंदे पर ज्यादा ध्यान दे रहा हूँ ता की पैसा कमा कर मान्यता खरीद सकूँ …ऐसे नहीं तो वैसे..
    प्रेम अरोड़ा
    काशीपुर
    9012043100

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    राजेंद्र March 27, 2013 at 3:41 PM |

    शाह जी साल भर की ही तो होगी ये मान्यता! फिरसे रिन्यू करानी पड़ेगी साल के आखीर में हर बार– ये मान्यता भी कोइ मान्यता हुई। और अगर महाहिमों को लगा कि सुर नहीं मिल रहा है तो इसके रद्द होने का भी ख़तरा होगा।आपके पास तो अपने पाठकों वाली असली मान्यता है। उसे कभी मत खोइये।

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