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    वी के जोशी January 23, 2011 at 4:52 PM |

    भवाली सैनीटोरियम बिक गया पढ़ कर अजीब सा लगा! पुरानी चीज़ें हटती हैं नई आती हैं, यह तो प्रकृति का नियम है. इसका बिकना गलत था या सही मैं इस बात की चर्चा नहीं कर रहा. मेरा तात्पर्य सिर्फ इतने से है कि भूगर्भशास्त्रियों के अनुसार यह क्षेत्र भ्रंशों से भरपूर है. ऐसे क्षेत्र में बड़ी बड़ी इमारतें बनाना कहाँ तक सुरक्षित होगा इस बात को पहले निश्चित कर लेना चहिये. पिछली बरसात के घाव अभी भरे नहीं हैं. भूस्खलन के हिसाब से भी यह क्षेत्र आपद ही है. प्रसिद्ध भूगर्भविद रोगर बिल्हम के मुताबिक मध्य कुमाऊं में बड़े भूकंप आने की सम्भावना को नकारा नहीं जा सकता. ऐसी परिस्थिति में कुछ भी करने के पूर्व वहाँ की भूमि की धारक क्षमता की भली भाँती परख कर लेनी चाहिए उसके पश्चात ही कर दाता का पैसा झोंकना चाहिए.

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