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    V.K. Joshi January 29, 2011 at 11:14 AM |

    गंगा की धारा काफी हद तक बर्फ पिघलने की दर पर निर्भर करती है. पर मात्र कुछ हिमनदों के सहारे ही गंगा सदानीरा रही है. हजारों गाड़-गधेरे गंगा को जल देते आये हैं. इनमे से अधिकाँश ठंड में सूख चुके होते हैं. वर्षा के जल से सराबोर यह गधेरे छोटी नदियों के द्वारा गंगा में जा मिलते हैं. इधर कुछ वर्षों से वर्षा के चक्र में परिवर्तन आया है. साथ ही वनों की अवैध कटान के कारण जो गधेरों का जल नदी में पहुंचना चाहिए वह भूमिगत हो जाता है. इस प्रकार अनेक कारण हैं जो गंगा की धारा को अविरल बहने में बाधा डाल रहे हैं. हमारे बाँध ही नहीं हमारे समस्त विकास कार्य नदियों में सिल्ट की मात्रा बढा रहे हैं. पर्वत की धाराएं आपनी क्षमता से अधिक बोझ ढोने में अपने को असमर्थ पाती हैं.
    दिक्कत यह है कि बिजली भी चाहिए ही-उसके बिना गुजारा नहीं. पन-बिजली सबसे सस्ती बिजली है. पर शायद ‘विश्व में सबसे बड़ा’ बनाने के चक्कर में हम बड़े बड़े बाँध बना लेते हैं जो गलत है. पर मात्र इन बाँधो से गंगा की धारा में फर्क नहीं आया है. कारण अनेक हैं जिनका निदान सरकार व समाज दोनों को मिल कर निकालना होगा.

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