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    घिंघारु June 29, 2010 at 12:52 PM |

    प्रदेश का नेतृत्व कर रहे लोगों की भी तो आप मजबूरी समझिये, आलाकमान, संघ परिवार और कोर नेतृत्व और पता नहीं कहां-कहां से उनको अनुमति लेनी पड़ती है। आप भी………………….. अब ऐसा जो क्या होता है कि जनता की सुनो, उसके मन की करो……………..जिसने नेता बनाया है, मुख्यमंत्री बनाया है, उससी पूछेंगे ना, वो जो बतायेगा वह करेंगे। जनता तो रोज ही कुछ न कुछ नया मांगती रहती है, सरकार कहां तक दे? कितन दे? और ये जनवादी मंच कर भी क्या लेंगे, आके एक-दो दिन हंगामा करेंगे फिर चले जायेगें, क्योंकि सरकार को मालूम है कि इनकी जेब में इतना पैसा नहीं है कि १०० लोगों को भी देहरादून में ५ दिन रुकवा सकें। तो फिर ………..आप भी असनोड़ा जी।

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