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    Mahesh Arya October 28, 2016 at 10:47 PM |

    नरभक्षी, एक डरावना शब्द । इस शब्द के पीछे छिपे कारण इससे भी डरावने है, जरुरत है इन कारणों के शिकार की, इन कारणों के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों पर समुचित कार्यवाही की।श्री पांडे जी का यह लेख क्या हमारी आँखें खोल पायेगा ? क्या इन अज्ञानी अधिकारियो को जिम्मेदार बना पायेगा ?

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    Subodh Juyal October 29, 2016 at 8:07 PM |

    थमती साँसो के अधूरे सपने……
    उत्तराखण्ड की देवभूमि मे देव तो रह जाऐंगे मगर इंसान लुप्त हो जाऐंगे। आज पहाड़ो के गाँव और जंगलो मे भेद कर पाना मुश्किल हो रहा है। सरकार की रिपोर्ट के अनुसार,पहाड़ी गाँव विकसित हो रहें है और वहाँ रहने वाले वासियो के अनुसार, हालत पहले से भी बदतर हो गई। सौलह साल बित जाने के बाद भी, ना सरकार जंगलो को काटने से रोक पाई और ना ही गाँव से पलायन। कितने ही गाँव ना जाने कहाँ खो गए। फिर भी उत्तराखण्ड की सरकार केवल मूक-दर्शक बन के देख रही है। सवाल उठता है, क्यों आज हम वहाँ रहना नही चाहते? क्यों हम अपनी संस्कृति और जन्म-भूमि को भूलते जा रहें है? क्यों हम भी पहाड़ी कहलाने या अपनी भाषा बोलने मे शर्म महसूस करते है? इतनी मात्रा मे भू-संपदा होते हुए भी, क्यों हम उस से दूर भाग रहें है? इस क्यों का जवाब कोई ओर नही देगा। इस का जवाब हम उत्तराखण्ड-वासियो को ढूँढना होगा। इसलिए हम पहाड़ी-सदस्यो की एक टीम बना रहें है। जो पहाड़ी-गाँवो को बचाने के लिए हमारा साथ और सहयोग देंगे। हम उत्तराखण्ड के पिछड़े और लुप्त होते गाँवो तथा देवी स्थानो को बचाने के लिए, वीडीयो डोकोमेनटरी बनाऐंगे। जिसे से हमारी स्थानीय सरकार को गाँव की स्थिति और देश के साथ, दुनिया को पहाड़ो की संस्कृति, भाषा, रीति-रिवाज और पवित्रता का पता लग सके। सभी उत्तराखण्ड वासियो से प्रार्थना है कि वो अपने गाँव, भाषा, जंगल, पहाड़ और हवा के लिए हमारा साथ दे ताकि प्राकृति और उत्तराखण्ड की पीढियाँ अपनी जन्म भूमि को बचाने के साथ, उस पर गर्व कर सकें। पहले पेड़ो बचाने के लिए चिपको आंदोलन किया था। अब पहाड़ो और वहाँ रहने वालो को बचाने के लिए आंदोलन चलना होगा।
    Uttarakhand Village Hindi Documentary – First time in History – Simply Heaven

    https://www.youtube.com/watch?v=tHcFp4a4P-M

    सुबोध जुयाल
    (आध्यात्मिक विशेषज्ञ, भौतिक विज्ञानी और लेखक)
    Mail id-kfpstar8@gmail.com

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