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    Nityanand Gayen August 8, 2013 at 9:17 AM |

    किसी भी समय में कवि
    यदि कवि है तो उम्मीद नहीं छोड़ता
    जानता है
    अपने हारते हुए दिल से भी मानता है
    एक दिन बारिश को बारिश का डर न होगा
    इतनी बढ़ जाएगी आपदा
    कि दुबक जाने को कोई घर न होगा

    आँख मलते जन सड़कों पर होंगे
    बारिश होगी
    जल होगा
    भले ही एक विशाल आज में घुटकर रह गए हों हम
    पर सरल बात है यह- कल होगा

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