पुलिस बर्बरता पर धूमाकोट में प्रतिरोध

Dhumakoteप्रस्तुति : नरेंद्र गौनियाल

पौड़ी के धुमाकोट में जीप चालक भगवान सिंह पर पुलिसकर्मियों द्वारा की गई बर्बरता का उत्तराखंड युवा बेरोजगार संगठन सहित क्षेत्र के सामाजिक संगठनों ने तीखा विरोध करते हुए दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्यवाही की माँग की है। क्षेत्र के विभिन्न संगठनों से जुडे लोगों ने बडी संख्या में तहसील मुख्यालय धुमाकोट में रैली निकाल कर पुलिस-प्रशासन का पुतला फूँका। एसडीएम कार्यालय के माध्यम से एक ज्ञापन प्रदेश के मुख्यमंत्री को प्रेषित किया।

संगठन के संयोजक मनीष सुंद्रियाल ने कहा कि पुलिस जनता को सहूलियत पहुँचाने के बजाय प्रताडि़त करने में लगी है। थाने-चौकियों तथा बैरियर्स पर अवैध वसूली करते हुए आम लोगों को परेशान किया जाता है तथा माफियाओं को संरक्षण दिया जाता है। यदि पीडि़त को शीघ्र न्याय न मिला तथा दोषी लोगों को दंडित न किया गया तो उग्र आंदोलन किया जायेगा। ज्येष्ठ प्रमुख सुरेंद्र बिष्ट, पृथ्वीपाल पर्णवाल, शिक्षाविद कामरूप शाह, व्यापार मंडल जड़ाऊँखांद के अध्यक्ष जगमोहन पटवाल आदि लोगों ने भी पुलिस ज्यादती की भत्र्सना की। इस मौके पर युवा बेरोजगार संगठन, व्यापार मंडल धुमाकोट, व्यापार मंडल जड़ाऊँखाँद, टैक्सीयूनियन सहित क्षेत्र के विभिन्न संगठनों के लोगों ने बडी संख्या में भागीदारी की।

धुमाकोट में रोजगार कार्यालय का कैम्प अनियमित हो जाने से भी युवाओं में नाराजी है। रोजगार कार्यालय लैंसडौन द्वारा बीसी खंडूरी के मुख्यमंत्रित्वकाल से प्रत्येक माह की 21 तारीख को कैंप लगाया जाता था। बाद में इसे एक माह छोड़ कर लगाया जाने लगा। किंतु अब पिछले तीन माह से यहाँ कोई कैंप नहीं लग पाया है, जिससे क्षेत्र के बेरोजगार परेशान हैं। क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता एम. डी. रावत, जंगबहादुर नेगी, मनीष सुंद्रियाल, पृथ्वीपाल, बीरेंद्र पटवाल, हरीश रावत, दीपक रावत, सुरेंद्र बिष्ट, अर्जुन पटवाल आदि ने प्रतिमाह रोजगार कार्यालय का कैम्प लगाने का सिलसिला पुनः शुरू करने की माँग की है।

धुमाकोट में बाबा मोहन उत्तराखंडी के शहादत दिवस पर तहसील मुख्यालय पर कई संगठनों ने धरना-प्रदर्शन किया तथा गैरसैण राजधानी की मांग को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया। स्थाई राजधानी गैरसैण में बनाने की मांग को लेकर 38 दिन के अनशन के बाद शहीद होने वाले बाबा मोहन उत्तराखंडी को श्रद्धांजलि देने वालों में युवा बेरोजगार संगठन के संयोजक मनीष सुंद्रियाल, शिक्षाविद कामरूपशाह, सामााजिक कार्यकत्र्ता पृथ्वीपाल पर्णवाल, लालसिंह, सुरेंद्र बिष्ट, आनंदसिंह, लीला देबी, सुनीता देवी, जंगबहादुर नेगी आदि शामिल थे। बाद में पाकिस्तान सीमा पर शहीद हुए भारतीय सैनिकों को भी श्रद्धांजलि दी गई।

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