चिणुक : मेरा सपना

Photo-0389परियों की दुनियाँ, फूल बगियाँ ये क्या हो सकता है। ये मेरा सपना है। हम सब के सपने होते हैं। मैं आज अपने सुन्हरे सपने के बारे में बताने वाली हूँ।

एक दिन में रात को सोई। मैंने अपने आप को सुन्हरे दुनियाँ में पाया। मैं एक परी से मिली वो वहाँ गंदगी साफ कर रही थी। अपनी जादुई छड़ी से कचरा साफ कर रही थी। मैंने उससे पूछा तुम क्या कर रही हो उसने कहा आज थोड़ी गंदगी हो गई है तो मैं उसे साफ कर रही हूँ। मैंने उससे कहा – पृथ्वी में रहती हूँ वहाँ लोग बहुत कूड़ा-करकट मचाते हैं। वो मेरे साथ पृथ्वी में आई और उसने और मैंने कूड़ा साफ किया। मैंने उससे वादा किया कि मैं कूड़ा नहीं करुंगी और मैं अचानक उठ गई मैंने सोचा अगर में सपना न देख रही होती तो कितना अच्छा होता। मैंने उससे वादा किया था कि मैं अपने शहर को साफ रखूंगी।

वर्षिता साह

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