महज औपचारिकता रही पंचेश्वर बांध की तीनों जन-सुनवाइयां

-नैनीताल समाचार डैस्क

डूब रहे 134 गांवों की चिंताओं को अनदेखा कर निपटा दी पंचेश्वर बांध की तीनों जन-सुनवाइयां!
Protest outside of the public hearing in Pithoragarh

पिथौरागढ़ में बांध और जनसुनवाई का विरोध करते लोग

पहाड़ में मानसून के मौसम में, प्रदेश भर से बरसात के चलते हुई तबाही की आ रही ख़बरों के बीच, भारत और नेपाल की सीमा पर बहने वाली महाकाली नदी पर पंचेश्वर में बनाई जा रही ‘पंचेश्वर बहुउद्देश्यीय परियोजना’ की तीन ‘जन-सुनवाइयों’ की औपचारिकता पूरी कर दी गई। ईआईए नोटिफिकेशन के दिशा-निर्देशों की सरासर अनदेखी करते हुए, तीनों ज़िलों- चम्पावत, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा में प्रशासन और राज्य के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सत्तारूढ़ भाजपा के इशारों पर काम करते हुए इन ‘पर्यावरणीय जन-सुनवाइयों’ में प्रभावित जनता, पर्यावरणविदों और विभिन्न सामाजिक संगठनों और स्वतंत्र कार्यकर्ताओं की आवाज़ों को दबाने की भरपूर कोशिश की जिन्होंने ​इस बांध परियोजना का विरोध किया। हालांकि विरोध की आवाज़ों ने ‘जन-सुनवाई’ के भीतर और इसके आयोजन स्थलों के बाहर भी अपनी भरपूर उपस्थिति दर्ज कराई।

तीनों ही जन-सुनवाइयों में दूरस्थ गांवों से किसी तरह पहुंचे ग्रामीणों ने रोष जाहिर किया कि परियोजना के ​बारे में बिना किसी तरह की जानकारी मुहैया कराए जन सुनवाइयां कराई जा रही हैं और जनसुनवाइयों के बारे में प्रभावित इलाकों में पर्याप्त सूचना नहीं प्रसारित की गई है। प्रभावित ग्रामीणों की यह भी शिकायत थी कि बरसात के बेहद संवेदनशील मौसम में जबकि एक तरफ सरकार की ओर से आपदा की चेतावनियां जारी की जा रही हैं ऐसे समय में जन सुनवाइयां कराई जा रही हैं। ज​बकि नदियों के किनारे बसा प्रभावित क्षेत्र बरसात के मौसम में बेहद संवेदनशील है और यातायात सुविधाएं पूरी तरह चरमराई हुई हैं।

9 अगस्त को चम्पावत में औपचारिकता निभा देने भर के लिए हुई जनसुनवाई में ईआईए नोटिफिकेशन का उल्लंघन करते हुए पैनल में सत्तारूढ़ भारतीय जनता के नेताओं का ही कब्ज़ा रहा। प्रभावित जनता ने आरोप लगाया कि उन्हें अपनी चिंताएं सामने रखने के लिए बोलने ही नहीं दिया गया।

वहीं 11 अगस्त को पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय में हुई जन सुनवाई बेहद हंगामेदार रही। सैकड़ों ग्रामीण सांस्कृतिक प्रतीकों को लेकर मार्च करते हुए आयोजन स्थल पर पहुंचे और गेट के बाहर उन्होंन जन सुनवाई के खिलाफ प्रदर्शन किया।

छोटे से सभागार में तकरीबन 16 हज़ार की प्रभावित होने वाली जनता के लिए आयोजित की गई इस जन सुनवाई में हॉल के भीतर सत्तरूढ़ भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं का कब्ज़ा रहा। यहां भी पैनल में सत्तरूढ़ भाजपा के नेता ही छाए रहे जबकि आधिकारिक तौर पर पैनल के लिए अधिकृत अधिकारी इन्हीं नेताओं के दिशानिर्देशों पर कार्यवाही करते रहे। इसे देख जब कांग्रेसी विधायक हरीश धामी ने विरोध दर्ज कराया तो हॉल में मौजूद भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उन्हें सभागार से बाहर कर दिया। इसी तरह उत्तराखंड क्रांति दल के वरिष्ठ नेता काशी सिंह ऐरी ने भी जब जन सुनवाई की प्रक्रियाओं पर प्रश्न उठाए तो भाजपा और प्रशासन के लोगों ने मिलकर उन्हें सभागार से बाहर निकाल दिया।

काशी सिंह ऐरी ने बाहर आकर पत्रकारों से बात करते हुए कहा, ”यहां कोई जन सुनवाई नहीं हो रही। यह सब उत्तराखंड की जनता के खिलाफ षड्यंत्र है। बीजेपी के लोग सारे सवालों का जवाब दे रहे हैं जबकि जो असल उत्तरदाई अधिकारी हैं वो पैनल में पीछे बैठे खामोश हैं।” इसी बीच कांग्रेस के विधायक हरीश धामी बाहर धरने पर बैठ गए। उन्होंने कहा, ” जन सुनवाई में जो भी बीजेपी की इच्छा के अलावा कोई दूसरी बात कह रहा है उसे सभागार सेबाहर कर दिया जा रहा है.” उधर ​भाजपा विधायक विशन सिंह चुफाल का कहना था, ”पंचेश्वर बांध विकास की परियोजना है. और कुछ लोग हर एक विकास परियोजना का विरोध करते हैं वही इसका भी विरोध कर रहे हैं।”

इसके बाद 17 अगस्त को तीसरी और अंतिम जन सुनवाई अल्मोड़ा के धौलादेवी ब्लॉक में आयोजित की गई। इस आयोजन में भी अल्मोड़ा ज़िले के प्रभावितों ने वहीं चिंता दौहराई कि उन्हें ना तो जन सुनवाई के बारे में समय से जानकारी मिल पाई और ना ही पंचेश्वर बहुद्देश्यीय विकास परियोजना की डीपीआर, ईआईए और अन्य ज़रूरी दस्तावेज़ मुहैया कराए गए।

इस सुनवाई में जब ​वरिष्ठ पत्रकार और समाजसेवी राजीव लोचन साह ने अपना पक्ष रखना चाहा तो सत्तारूढ़ भाजपा के इशारों पर प्रशासन ने उन्हें बोलने से एकदम रोक दिया. खुद संचालन कर रहे एसडीएम ने उन्हें बोलने से रोका और तर्क दिया कि बाहर से आकर लोग नहीं बोलेंगे. यह भी ईआईए नोटिफिकेशन (जिसके तहत यह जन-सुनवाई हो रही थी) का साफ तौर पर उल्लंघन था क्योंकि प्रशासन किसी भी व्यक्ति को इस तर्क के साथ बोलने से नहीं रोक सकता। एसडीएम पुलिस और सत्तारूढ़ भाजपा के लोग जब साह से माइक छीनने झपटे तो उन्होंने विरोध किया लेकिन उन्हें पुलिस की मदद से सभागार से बाहर कर दिया गया। इससे साफ पता चलता है कि प्रशासन कितना संवेदनशील और जवाबदेह था.
कुछ देर बाद जब कथित ‘जन-सुनवाई’ फिर शुरू हुई तो पैनल में मौजूद और ज़िले की डीएम ने बताया, “अगर अमेरिका से आकर भी कोई इस जन-सुनवाई में बोलना चाहेगा तो हम टेक्निकली उसे रोक नहीं सकते.”
जबकि उनके इस प्रशासन ने उनके ही सामने उत्तराखंड के सरोकारों से जुड़े एक वरिष्ठ पत्रकार के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए उन्हें बोलने का मौका ना देकर सभागार से बाहर कर दिया. प्रशासन ने कानून की खुद धज्जियां उड़ा दी और डीएम यह सब देखती हुई मुस्कुराती रहीं.
राजीव लोचन साह के साथ हुई इस अभद्रता का जन-सुनवाई में शामिल होने आए वरिष्ठ समाजसेवी और उत्तराखंड लोक वाहनी के अध्यक्ष शमशेर सिंह बिष्ट ने विरोध किया। उन्होंने कहा ”यह बहुत चिंताजनक बात है कि उन लोगों को जन सुनवाई में बोलने नहीं दिया जा रहा जो असल में प्रभावित लोगों की बात उठाना चाहते हैं। यहां राजीव लोचन साह को नहीं बोलने दिया गया और पिथौरागढ़ में काशी सिंह ऐरी को नहीं बोलने दिया गया। ऐसा लग ही नहीं रहा कि यहां जन सुनवाई हो रही है।”

कांग्रेस का रवैया धौलादेवी की जनसभा में ढुलमुल दिखा। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और स्थानीय विधायक गोविंद कुंजवाल ने कहा, ”मैं व्यक्तिगत् तौर पर बड़े बांधों के खिलाफ रहा हूं, लेकिन मेरी पार्टी का पंचेश्वर के बारे में क्या स्टैंड है मैं अभी नहीं जानता। मैंने जन—सुनवाई में अपील की है कि प्रभावित होने वाली जनता की सुनी जाए और उन्हें पर्याप्त मुआवजा मिले।”

वहीं भाजपा के नेता और अल्मोड़ा से विधायक रघुनाथ चौहान ने कहा, ”पंचेश्वर बांध राष्ट्रनिर्माण की योजना है और प्रभावित होने वाली जनता को चाहिए कि वे राष्ट्र निर्माण के कार्यों में अपनी आहूति दे।”

कुल मिलाकर उत्तराखंड के 134 गांवों के अस्तित्व के पर छाए संकट ‘पंचेश्वर बहुउद्दश्यीय विकास परियोजना’ के लिए हो रही बेहद संवेदनशील जनसुनवाइयों को महज एक औपचारिकता की तरह निपटा दिया गया। तीनों ही जन-सुनवाई में ईआईए नोटिफिकेशन में निर्दिष्ठ प्रक्रियाओं का स्पष्ट उल्लंघन किया गया और तीनों ही जगह सत्तारूढ़ भाजपा के लोगों ने जन सुनवाइयों पर कब्ज़ा जमाए रखा। इस सबने प्रभावित जनता और सरोकारों से भरे लोगों को विशालकाय पंचेश्वर बांध के प्रति और ज्यादा आशंकाओं में डाल दिया है।

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