One Response

Page 1 of 1
  1. avatar
    निखिल उत्तराखंडी March 19, 2012 at 12:41 AM |

    बहुत ही रोचक वर्णन किया है आपने उत्तराखंडी समाज की होली का दिल्ली विश्वविद्यालय में और खासकर छात्रावासों में … मै भी वर्तमान में यहाँ के एक अन्य छात्रावास मानसरोवर हॉस्टल में रहता हूँ … और हमारे विश्वविद्यालय में उत्तरखंडी कर्मचाररियों की संख्या पहले से बढ़ी ही है … खासकर होस्त्ल्स की मैस कर्मचारी तो बहुसंख्यक कुमाऊँ के साल्ट से हैं …. पर अफसोस कि अब वह एकता की भावना नहीं रही …. होली तो क्या किसी भी त्योहार में कोई सामुदायिक मिलन समारोह आदि जैसी कोई प्रथा नहीं रही है ….
    लोगों की बढ़ती आमदनी के साथ उनके घरों की दीवारें भी ऊँची होती जा रही हैं ….

    Reply

Leave a Reply

%d bloggers like this: