2 Responses

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    घिंघारु October 12, 2010 at 1:14 PM |

    यही तो गिर्दा, निस्वार्थ भाव से काम करने वाला, औरों से अलग जो सिर्फ आत्मसम्मान और अपने को स्थापित करने के लिये इन विधाओं का सहारा लेते हैं।

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    घिंघारु October 12, 2010 at 1:19 PM |

    यही तो था गिर्दा, निस्वार्थ भाव से काम करने वाला। औरों से अलग, सबसे जुदा, उनका जैसा नहीं, जो सिर्फ स्वसम्मान और अपने को स्थापित करने के लिये इन विधाओं का सहारा लेते हैं और फेमस हो जाने पर इनके ठेकेदार बने फिरते रहते हैं।

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