क्या आपने नयना ज्योति के नेत्र शिविर देखे ?

Nayana Jyotiदेश में दिन-प्रतिदिन नवीनतम तकनीकी से युक्त नये-नये अस्पताल खुलते जा रहे हैं, मगर समाज के गरीब तबके के लिये नयी तकनीकी तो छोड़ें, पुरानी व्यवस्था भी दुर्लभ हो गई है। इस माहौल में 2001 में स्थापित नयना ज्योति समिति के स्वास्थ्य षिविरों का विशेष महत्व हो जाता है। इनमें भी नेत्र शिविरों, जो नैनीताल में जन्मे और पढ़े विख्यात नेत्र विशेषज्ञ डॉ. विनोद तिवारी के चिकित्सा दल द्वारा लगाये जाते हैं, की बात ही कुछ और है। बगैर रुकावट के 13 साल से चल रहे इन शिविरों का अब क्षेत्रीय जनता बेकरारी से इन्तजार करती है।

इस वर्ष 31 अगस्त से 6 सितम्बर तक यह शिविर कैंची हनुमान मंदिर व आश्रम ट्रस्ट से प्राप्त आर्थिक सहायता से लगाया गया। प्रथम चरण में अल्मोड़ा, नथुवाखान, कैंची, छोई व नैनीताल में बाह्य चिकित्सा (ओपीडी) की गई, जिनमें 1800 से अधिक व्यक्तियों के नेत्र विकारों की जाँच की गई। दूसरे चरण में नैनीताल के गोबिंद बल्लभ पंत अस्पताल में 3 से 6 सितम्बर तक मोतियाबिंद के 143 आपरेशन किये गये। 6 सितम्बर को पुनः रोगियों के नेत्र विकारों की जाँच की गई। इस शिविर का लोअप 29 सितम्बर को किया जायेगा। इस बार के शिविर के लिये एल.वी. कृष्णा फाउण्डेशन दिल्ली, जिला अंधता निवारण समिति नैनीताल, लाॅज कुमाऊँ और महिला समाख्या की विशेष भूमिका रही। मगर इतने लम्बे समय से चल रहे इस अभियान, जिसके लिये अब सरकार से भी कोई मदद नहीं ली जाती, की सफलता के पीछे अल्मोड़ा और नैनीताल के उन दिनोंदिन बढ़ते निःस्वार्थ स्वयंसेवकों का संकल्प है, जो शिविर के दिनों में अपना खाना-पीना भी भूल जाते हैं। शिविर से लाभन्वित होने वाले व्यक्ति आमतौर पर यह कहते हुए मिलते हैं कि यह सेवा भाव अब अन्यत्र दुर्लभ है। आज जब समाज सेवा एक धंधा बन गयी हो, काम की गुणवत्ता के बदले उसमें रिबन कटवा कर उद्घाटन करवाना ज्यादा जरूरी हो गया हो, नयना ज्योति के कार्यक्रमों में न उद्घाटन होता है और न समापन। न ही किसी भी नेता-मंत्री को आमंत्रित किया जाता है और न ही अखबारों में फोटो के साथ खबर छपवाने की कोशिश की जाती है। इन विशेषताओं के कारण लोग अब नयना ज्योति के शिविरों में इलाज कराने ही नहीं, बल्कि इन्हें देखने के लिए भी आते हैं। हालाँकि स्थानीय मीडिया की इन शिविरों में विशेष रुचि नहीं होती और जरूरतमंदों को इनकी पूर्व सूचना देने की जिम्मेदारी से तो वह हमेशा ही कतराता है। समिति के स्वयंसेवकों को ही गाँव-गाँव के स्कूलों तक पहुँच कर, ग्रामीण क्षेत्र की दुकानों में पोस्टर लगा कर, लोगों के साथ अपनत्व से बातचीत कर या कहीं चैलेंजर से एनाउंसमेंट कर इन शिविरों की सूचना देनी पड़ती है। मीडिया सहयोग करे तो इन शिविरों से और अधिक लोग लाभान्वित हो सकते हैं।

नयना ज्योति के शिविरों में मोतियाबिंद के ऑपरेशन मुख्यतः फेको-इमलसिफिकेशन विधि से किये जाते हैं। इस विधि में चीरा इतना छोटा होता है कि आँख में टाँका लगाने की आवश्यकता नहीं होती और रोगी बहुत जल्दी सामान्य हो जाता है। इन नेत्र शिविरों में केवल मोतियाबिंद ही नहीं, बल्कि सारे जटिल नेत्र रोगों का निदान किया जाता है व बहुमूल्य चिकित्सकीय सलाह दी जाती है। जटिल रोग वाले असमर्थ व गरीब रोगियों को डॉ. तिवारी के वैशाली स्थित अस्पताल में भेजकर चिकित्सा सुलभ करायी जाती है। इसलिये इन तेरह सालों में कुछ अद्भुत सफलतायें नयना ज्योति को मिली हैं। एक शिविर में निदान हो जाने के बाद 22 वर्ष पहले अपनी आँखों की पूरी रोशनी खो चुके नैनीताल के एक व्यक्ति को पुनः दुनिया को देखने का सौभाग्य मिला। एक अन्य उपलब्धि में दूरस्थ गाँव बगड़ के एक निर्धन दलित परिवार के तीन जन्मांध बच्चों का दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में इलाज करवा कर उनकी आँखों में पुनः रोशनी लायी गई। घुग्घूखान के एक गरीब परिवार के दो बच्चों की नेत्र ज्योति लगातार कम हो रही थी और शरीर कमजोर हो रहा था। डॉ. तिवारी ने निदान दिया कि बच्चों को ‘मारफंस सिड्रोम’ नामक बीमारी है, जिसमें शरीर के सभी अंग पतले व कमजोर होते जाते हैं। इन बच्चों का इलाज डॉ. तिवारी व उनकी पत्नी डॉ. लीला तिवारी की सहायता से दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों में किया गया। अभी कई इलाज शेष है, लेकिन बच्चों को लाभ हो रहा है।

इस प्रकार के बड़े आयोजनों के लिए कोष एकत्र करना एक समस्या होती है, पर नयना ज्योति की ख्याति के कारण उसका काम पैसे के अभाव में कहीं नहीं रुका। प्रशंसक और लाभार्थी किसी न किसी रूप में सहायता करते ही हैं। एक बार एक सामान्य वित्त की एक रिटायर्ड अध्यापिका ने ही पचास हजार रुपये दे डाले। और कुछ न हुआ तो किसी टैण्ट हाऊस वाले ने कुर्सियाँ और जनरेटर मुफ्त में उपलब्ध करवा दिये, किसी ने दानस्वरूप भोजन के लिये सब्जियाँ उपलब्ध करवा दीं तो किसी ने दूध। जनता के सहयोग को अधिक प्रभावी बनाने के लिए अब नयना ज्योति ने 200 दानदाताओं को पंजीकृत कर उनसे 1,000 रुपया प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष की दर से दान लेने का इरादा किया है। इस प्रक्रिया में कम से कम 200 सक्रिय कार्यकर्ता और प्रचारक भी तैयार हो जायेंगे। इस वर्ष नयना ज्योति के शिविर के समापन के दिन कूर्माचल नगर सहकारी बैंक ने डॉ. तिवारी, उनके चिकित्सा दल तथा नयना ज्योति के सचिव को शाल ओढ़ा कर उनका आभार व्यक्त किया।

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