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    घिंघारु October 6, 2010 at 2:37 PM |

    गिर्दा पता नहीं क्या क्या था,
    उत्तराखण्ड की जान था गिर्दा,
    जन सामान्य की आवाज था गिर्दा,
    लिख नहीं पाऊंगा, उतना विशाल था गिर्दा।

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