चैंपियन का निशाना

Championआये दिन जंगली जानवरों के अवैध शिकार करने और सार्वजनिक स्थानों पर गोलियाँ दागने के कारण चर्चित रहने वाले खानपुर, हरिद्वार के विधायक प्रणव सिंह चैम्पियन विजय बहुगुणा के गले की फाँस बन गये हैं। कांग्रेस की गुटीय राजनीति में कभी हरीश रावत समर्थक रहे प्रणव इन दिनों बहुगुणा के विश्वासपात्र हैं।

विधानसभा सत्र की पूर्व संध्या पर गत 17 सितम्बर 2013 को कृषि मंत्री हरक सिंह रावत ने अपने निवास पर रात्रिभोज दिया था, जिसमें अनेक मंत्री, सत्तारूढ़ दल के विधायक और कांग्रेस के कई पदाधिकारी उपस्थित थे। जब अतिथिगण खाने का आनन्द ले रहे थे, तभी गोलियों की आवाज से कृषिमंत्री का आवास थर्रा उठा। गोली लगने से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विवेकानंद खंडूरी और मंगलौर के विधायक फुरकान अहमद के साथ आये कांग्रेसी कार्यकत्र्ता रविन्द्र सैनी घायल हो गये। बताया जाता है गोलियाँ खानपुर के विधायक कुँवर प्रणव ने चलाई थी। ये गोलियाँ उन्होंने कैसे चलायी कोई नहीं जानता। सत्ता पक्ष की ओर से मामले को दबाने की पूरी कोशिश की गयी। हरक सिंह रावत ने इस मामले में कोई भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया और कहा कि उन्हें नहीं पता कि बाहर क्या हुआ, क्योंकि वे अन्दर व्यवस्था बनाने में लगे हुए थे। मुख्यमंत्री बहुगुणा को भी भोज में पहुँचना था लेकिन गोली चलने की सूचना मिलने पर उनका कार्यक्रम रद्द कर दिया गया। कांग्रेस के किसी नेता, विधायक या मंत्री की ओर से प्रणव के खिलाफ कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं करवाई गयी। लेकिन विधानसभा का सत्र चलने के कारण भाजपा ने प्रदेश सरकार को दबाव में लेने के लिये कोई कमी नहीं छोड़ी। कांग्रेस की ओर से कहा गया कि समारोह में गोली नहीं बल्कि पटाखा फोड़ा गया था। उसी से कुछ लोगों को भगदड़ के कारण मामूली चोटें आई हैं। प्रणव गिरफ्तारी के डर से विधानसभा सत्र में भाग लेने नहीं पहुँचे।

भाजपा ने 18 सितम्बर को सदन की कार्रवाही शुरू होने से पहले विधानसभाध्यक्ष गोविन्द सिंह कुँजवाल से मुलाकात की और घटना की न्यायिक जाँच की मांग की। भाजपा विधायक दल ने राज्यपाल अजीज कुरैशी को भी एक ज्ञापन सौंपकर ऐसी ही मांग की और आरोप लगाया कि सरकार मामले को दबाने का प्रयास कर रही है। उसी दिन कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री बहुगुणा को दिल्ली तलब किया और घटना के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट भेजने का निर्देष दिया। सरकार पर राजनैतिक दबाव बना तो पुलिस ने चैम्पियन के परिवार वालों से हरिद्वार में पूछताछ की, लेकिन कोई मामला विधायक के खिलाफ दर्ज नहीं किया बल्कि अज्ञात के खिलाफ जमानती धाराओं 337 व 338 में मामला दर्ज किया। इस प्रकरण में सबसे आश्चर्यजनक तथ्य यह रहा कि अति विशिष्ट व्यक्तियों वाली पार्टी में एक भी चश्मदीद गवाह पुलिस को नहीं मिला। उधर एक घायल रविन्द्र सैनी बहादरबाद, हरिद्वार स्थित अपने घर से परिवार वालों सहित रातोंरात गायब हो गया। उक्रांद (जी) ने भी आरोप लगाया कि कांग्रेस अपराधी किस्म के अपने विधायकों व मंत्रियों को हमेशा बचाती आयी है। भाकपा (माले) ने भी विधायक प्रणव की गिरफ्तारी और रिवाल्वर का लाइसेंस रद्द करने की मांग की।

मुख्यमंत्री बहुगुणा के इशारे पर पुलिस प्रशासन मामले को लगभग पूरी तरह दबा चुकी थी, मगर 20 सितम्बर 2013 को विधानसभाध्यक्ष गोविन्द कुँजवाल ने यह कहकर पाँसा पलट दिया कि रात्रिभोज में गोली विधायक प्रणव ने ही चलायी। वे भी गोली लगने से बाल-बाल बचे थे। उस दौरान कई मंत्री और विधायक वहाँ मौजूद थे। किसी भी जनप्रतिनिधि द्वारा ऐसा किया जाना बेहद शर्मनाक है। ऐसे कृत्यों से प्रदेश सरकार की छवि धूमिल होती है। सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिये। कुँजवाल के बयान के बाद मुख्यमंत्री बहुगुणा को भी कहना पड़ा कि कानून अपना कार्य करेगा। इसके देर शाम को विधायक प्रणव ने कैंट थाने, देहरादून में आत्मसमर्पण किया और उन्हें थाने से ही जमानत दे दी गयी। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक केवल खुराना ने कहा कि विधायक को अपना रिवाल्वर जमा करने को कहा गया है और उसका लाइसेंस रद्द किया जायेगा। कुँजवाल के बयान को हरीश रावत की ओर से मुख्यमंत्री पर राजनैतिक दबाव बनाने के रूप में देखा गया, जिसमें वे सफल रहे। अपनी राजनैतिक किरकिरी होते देख कर बहुगुणा को अपने कदम पीछे खींचने पड़े और प्रणव को आत्म समर्पण के लिये कहना पड़ा।

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