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    आदरणीय महोदय
    यह हमारा दुर्भाग्य ही कहा जायेगा कि हमारे देश में धर्मनिरपेक्षता की आड में एक संप्रदाय विशेष के तुष्टीकरण को ही महिमामंडित किया जाता है। कदाचित यही मनोवृति पूर्व में अखंड भारत के विभाजन का भी कारण बनी थी। वास्तव में हमें अतिवाद को देखने के लिये सांप्रदायिक चश्में को उतारना होगा।

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