‘कुत्तों ने नोचा था लोहाघाट में बछड़े का सिर’

“हम बछड़े के अवशेषों की फोरेंसिक जांच करवाने के बारे में पता कर रहे हैं। लेकिन परिस्थितिजन्य साक्ष्य के अनुसार यह बहुत स्पष्ट है कि किसी इंसान ने इस बछड़े का सिर नहीं काटा है, जबकि पहले से ही मृत इस बछड़े के सिर को धड़ से अलग करने का काम कुत्तों ने किया है।” – राम चंद्र राजगुरू, एसपी चंपावत. 

प्रतीकात्मक तस्वीर

17 नवंबर को लोहाघाट गैस गोदाम के पास बछड़े का कटा हुआ सिर मिलने के मामले पर चंपावत के एसपी ने बुधवार को एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि पुलिस जांच के मुताबिक इस बछड़े का सिर धड़ से अलग किसी इंसान ने नहीं किया था जबकि पहले से ही मृत इस बछड़े के सिर को जानवरों ने धड़ से अलग किया था।

एसपी चंपावत राम चंद्र राजगुरू ने कहा, “हम बछड़े के अवशेषों की फोरेंसिक जांच करवाने के बारे में पता कर रहे हैं। लेकिन परिस्थितिजन्य साक्ष्य के अनुसार यह बहुत स्पष्ट है कि किसी इंसान ने इस बछड़े का सिर नहीं काटा है, जबकि पहले से ही मृत इस बछड़े के सिर को धड़ से अलग करने का काम कुत्तों ने किया है।”

राजगुरू ने आगे बताया, “जांच के दौरान, पुलिस ने घटना स्थल के पास लगे 3 सीसीटीवी कैमरों की जांच की। पेट्रोल की पंप लोहाघाट के पास लगे सीसीटीवी कैमरे का फुटेज दिखा रहा है कि एक काले रंग का कुत्ता बछड़े के सिर को ले जा रहा है।”

एसपी ने कहा कि पुलिस ने लोहाघाट शहर और आसपास के गांवों की कॉंबिंग की। इस दौरान दो आस-पास के स्थानों पर बछड़े के कुछ अवशेष पाए गए, जिन्हें जानवरों (कुत्तों) ने बुरी तरह नुकसान पहुंचाया हुआ है। इन अवशेषों के डीएनए परीक्षण के लिए हम किसी ऐसी फोरेंसिक प्रयोगशाला से संपर्क की कोशिश कर रहे हैं जो कि जानवरों के डीएनए पर काम करती हो। इस परीक्षण के बाद सारी चीजें पूरी तरह से स्पष्ट हो जाएंगी।”

जब से यह वाकिया सामने आया था ​तब से क्षेत्र में तनावपूर्ण हालात बने हुए थे और शांति व्यवस्था पर खतरा मडराता दिख रहा था। मीना बाज़ार लोहाघाट निवासी गोविंद वर्मा ने लोहाघाट थाने में तहरीर देकर अज्ञात लोगों के खिलाफ उत्तराखंड गोवंश संरक्षण ​अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज कराई थी।

कुछ दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़े लोगों ने घटाना पर रोष जाहिर करते हुए मीट व्यापारियों की दुकानों की जांच करने की मांग की थी और कुछ दुकानों को जबरन बंद करवाया था। घटना के बाद से, बछड़े के कटे सिर की तस्वीर के साथ एक विशेष समुदाय के खिलाफ लिखे गए संदेश भी सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर वायरल हो रहा थे।

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