दरगाह की आड़ में आपराधिक काम

Dargahहल्द्वानी नगर निगम का संयुक्त नगर होकर भी काठगोदाम एक शान्त छोटे कस्बे के रूप में जाना जाता है। पिछले कुछ समय से यहाँ संगठित अपराध करने वाले गिरोहों की गतिविधियाँ बढ़ गई हैं। 24 जुलाई को पुलिस ने महिलाओं की चेन व जेवर लुटने व गाडि़यों की चोरी करने वाले गिरोहों के जिस सरगना हशमत अली को 10 टायर वाले ट्रक की चोरी में और चेन चुराने वाले गिरोह का संरक्षण देने के आरोप में गिरफ्तार किया, वह बहुत थोड़े समय में कैसे इतनी सम्पत्ति का मलिक बन गया यह अब रहस्य नहीं रहा। इस काण्ड में अब अनेक सफेदपोश लोगों को शर्म से मुँह छिपाना पड़ रहा है।

यह व्यक्ति कुछ समय पहले तक गौला नदी में घोड़े-खच्चर चलाता था। इसने ऑटो भी चलाया। अब यह बड़ा ऑटो लिफ्टर (गाड़ी चोर) है। किसी तरह तिकड़म करके वह काठगोदाम स्थित एक सूफी संत की दरगाह का पदाधिकारी बन गया, जहाँ से दरगाह में आने वाली मोटी कमाई पर तो उसका अधिकार हो ही गया, अपना नेटवर्क बनाने में भी मदद मिली। पिछले विधान सभा चुनाव में इसके गैंग ने हर पार्टी का माल काटा। हालाँकि नगर निगम चुनाव में उसका यह तरीका नहीं चला।

इसी दौरान हशमत अली ने अपने गैंग को मजबूत करने के लिए दरगाह कमेटी में हथियाए गए पद का और अधिक लाभ उठाना शुरू कर दिया। उसका साथ काठगोदाम के एक रेता-बजरी माफिया ने भी देना आरम्भ कर दिया। इस घृणित जुगलबंदी में दरगाह की सूफी परम्परा को समाप्त करने का कुत्सित प्रयास किया गया। दरगाह में होने वाले सालाना उर्स के मौके पर होने वाली कव्वाली को रोकने के लिए कट्टरवादी मजहबी सोच वाले लोगों को एकजुट किया गया। जो व्यक्ति पहले ऑटो चलाकर परिवार पालता था, वह अब काली सफारी में दरगाह कमेटी का बड़ा सा बोर्ड लगाकर मजहबी लोगों को चलाने लगा। बड़े सम्मानित नाम ‘हजरत’ से पुकारे जाने लगने के बाद उसने परम्परागत कव्वाली कराने के स्थान पर मजहबी विद्वानों के भाषण के कार्यक्रम तय कर दिए। शेर अली बाबा पर श्रद्धा रखने वाली काठगोदाम की जनता ने हजरत हशमत के इस तालिबानी कट्टरवाद का विरोध किया तो उसके गुंडों ने श्रद्धालुओं को धमकाना शुरू कर दिया। मगर जीत जनता की हुई, जिसने प्रशासन की मदद से हजरत शेर अली शाह बाबा की दरगाह में हर साल लगने वाले सालाना उर्स में कव्वाली गायन की परम्परा टूटने नहीं दी।

5 मई को उर्स सम्पन्न होने के बाद भी हशमत अली अपने करतबों से बाज नहीं आया और उसने कव्वाली कराने व उनके समर्थक श्रद्धालुओं को धर्म बहिष्कृत का फतवा बरेली की एक मजहबी संस्था से 10 मई को मंगा लिया। इस बीच दरगाह प्रबन्ध कमेटी के नये चुनाव होने की बात उठने लगी तो इन हजरत ने एक प्रमुख राजनीतिक पार्टी के अभी हाल में उगे सितारे के माध्यम से प्रशासन पर दबाव डलवाया। पुलिस द्वारा काठगोदाम के अनेक शान्तिप्रिय लोगों पर शान्ति भंग करने के मुकदमे लगा दिए गये। इस बात का पूरा प्रयास किया गया कि माहौल खराब हो जाए और हजरत अपने उद्देश्य में कामयाब हो जाए।

24 जून को पुलिस ने हल्द्वानी में महिलाओं की चेन लूटने वाले गिरोह के एक सदस्य को पकड़ा उससे पूछताछ में पता चला कि यह हजरत ही इस गिरोह के सरगना हैं। जब इन हजरत से सख्ती से पूछताछ की गई, तो इसने पुलिस को भी गुमराह किया। मगर अन्ततः पुलिस ने सुराग लगाकर उसे एक 10 टायरा ट्रक की चोरी के लिये पकड़ ही लिया। पुलिस द्वारा हशमत अली से की गई पूछताछ में और सनसनीखेज मामलों के खुलासे हो रहे हैं। इन हजरत के जेल जाने के बाद इनके मजहबी रहनुमाओं के होश फाख्ता हैं। उन्हें अपनी कारगुजारियों का डर सताने लगा है और वे जहाँ-तहाँ अपनी सफाई दे रहे हैं।

गैंगलीडर हशमत अली की अब तक जमानत नहीं हो पाई है और उसकी सफारी कार एक गैरेज में चारों पहिए निकाल कर कर खड़ी करवाई गई है।

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