भ्रष्टाचार में डूबा दुग्ध संघ

अरविन्द चौहान

अक्षम प्रबंधन एवं भ्रष्टाचार किसी जनोपयोगी संस्थान को कैसे बरबादी की कगार पर ले जाता है, इसकी बानगी जनपद चमोली के सिमली में स्थित दुग्ध संघ में देखी जा सकती है। इस पर निर्भर 7 दुग्ध समितियों एवं ट्रांसपोर्टरों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। वर्ष 2001 में स्थापित इस डेयरी का गठन बेरोजगारों को दुग्ध उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करना एवं रोजगार के अवसर पैदा करना था, लेकिन दुर्भाग्य रहा कि जन्म से ही यह निरन्तर अव्यवस्था एवं भ्रष्टाचार में फँसा रहा। वर्तमान में तमाम सरकारी मदद के बावजूद संघ प्रति वर्ष लगभग 3 लाख रुपए का घाटा दिखा रहा है।

सूचना के अधिकार के तहत जानकारी माँगने पर अधिकारी तमाम तरह की हीलाहवाली कर रहे हैं। सुनील रावत द्वारा प्रार्थना पत्र के साथ भेजे गये पोस्टल ऑर्डर दुग्ध संघ द्वारा प्रार्थी को वापस भिजवा दिये गये, जबकि नियमानुसार इन्हें सरकारी खाते में जमा होना चाहिए था। इस सूचना से संतुष्ट न होने पर प्रार्थी ने प्रथम अपीलीय अधिकारी डेरी विकास उत्तराखंड के समक्ष अपील की तो पुनः वही सूचना छायाप्रति कर प्रेषित कर दी गयी। लापरवाही की इंतिहा यह थी कि प्रथम अपीलीय अधिकारी ने अपने हस्ताक्षर न कर, डेरी संघ सिमली के सूचना अधिकारी के हस्ताक्षर वाला पृष्ठ ही दे दिया।

जनवरी से सितंबर 2013 तक संघ ने 30 रु. प्रति लीटर की दर से कुल 1,37,731 लीटर दुग्ध वितरण कर 41,31,930 रुपए की आय की। समितियों से दूध 18 रुपए की दर से खरीदा जा रहा है। इस प्रकार प्रति लीटर 12 रुपए के दर से 16,52,772 रुपये का लाभ हुआ, लेकिन हालत ये है कि विगत जुलाई से ट्रांस्पोर्टरों का भुगतान नहीं किया गया है। ट्रांस्पोर्टरों का आरोप है कि दुग्ध संघ जाने पर प्रबन्धक कार्यालय में नहीं मिलते और अधिकारी-कर्मचारी बजट न होने का रोना रोते हैं। यदि ऐसा ही हाल रहा तो ट्रांस्पोर्टर दुग्ध वितरण बंद कर आंदोलन कर देंगे।

संघ मे प्लांट ऑपरेटर पद पर कार्यरत एक कर्मचारी ने अपनी प्राइवेट इंडिगो सीएस गाड़ी बिना किसी टेंडर के प्रशासक के प्रयोगार्थ लगाई हुई है और वह स्वयं चालक बना हुआ है। राजनैतिक पार्टी का झण्डा एवं बोर्ड लगी यह गाड़ी सात माह से बिना नंबर प्लेट के चल रही है। इसका बिल उसी कर्मचारी की दूसरी गाड़ी मारुति ओमिनी के नाम से निकाला जा रहा है। वर्ष 2010-11 में इस गाड़ी पर व्यय 1,61,752 रुपए बताया गया जो कि एक ही वर्ष मे 5 गुना बढ़ कर वर्ष 2011-12 मे 7,89,369 रुपए हो गया तथा फिर वर्ष 2012-13 मे डेढ़ गुना बढ़ कर 10,79,534 रुपए। दुग्ध संघ में करोड़ांे की लागत से लगाया गया पैकेजिंग प्लान्ट वर्ष 2004 से बंद पड़ा है। प्रबन्धक मान सिंह पाल सफाई देते हैं जिलाधिकारी महोदय से वार्ता की गयी है और प्लान्ट की मरम्मत पर लगभग 80 लाख रुपये का खर्चा आने की उम्मीद है। परिसर में बनी गोमूत्र अर्क संशोधन मशीन धूल फाँक रही है। लगभग 100 नाली बेशकीमती जमीन बंजर पड़ी हुई है।

गत माह संघ द्वारा सड़क से संघ भवन तक लगभग 50 मीटर रास्ता बनाने के साथ एक चबूतरे की मरम्मत का कार्य करवाया गया। इसकी लागत 8 लाख रुपए बताई जा रही है। इस काम में घोटाला साफ दिखाई दे रहा है, हालाँकि प्रबन्धक का कहना है कि यह कार्य निदेशालय से टेंडर निकाल कर किया गया था। दुग्ध संघ से सम्बद्ध 7 समितियों एवं ट्रांस्पोर्टरों को डर है कि हालात ऐसे ही रहे तो वह दिन दूर नहीं जब डेयरी पर ताले लटके नजर आएँगे।

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