आपदापीडि़तों के किट पर कमीशनखोरी कर रहे हैं कफनफरोश

Rahat kitअतिवृष्टि से आई आपदा को चार महीने बीतने को आये, मगर राहत कार्य में लापरवाही बरतने और दूसरी आर्थिक अनियमितताओं की शिकायतें दिनोंदिन बढ़ रही हैं। आपदा में फंसे लोगों को निकालने के लिये सेना ने हेलीकॉप्टरों का सहारा लिया था। लोगों की संख्या बहुत अधिक होने से सेना ने ज्यादा से ज्यादा हेलीकॉप्टरों की मांग की तो नागरिक उड्डयन विमान के प्रमुख सचिव राकेश शर्मा ने यह मांग यह कहते हुए खारिज कर दी कि पर्याप्त संख्या में हैलीपैड उपलब्ध नहीं हैं। मगर उसके बाद से मंत्रियों, अधिकारियों, पत्रकारों व चकड़ैतों को राहत कार्य के नाम पर हवाई यात्रा करवाने के लिये निजी क्षेत्र के हेलीकॉप्टरों को किराये पर लिया गया। बताया जाता है यह निर्णय प्रमुख सचिव राकेश शर्मा और मुख्यमंत्री पुत्र साकेत बहुगुणा का था। कितने हैलीकॉप्टर किराये पर लिये गये, इसका कोई स्पष्ट लेखा-जोखा नहीं है। बताया जा रहा है कि लगभग 50 चोपर लिये गये, जिनमें से कुछ सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की कम्पनी के भी थे। इन हैलीकॉप्टरों का लगभग 440 करोड़ किराया प्रदेश सरकार के सर पर है। उसके लिये परेशानी का सबब यह है कि जब सभी यात्रियों को सेना ने निकाला तो अब सरकार निजी चॉपरों के किराये का भुगतान किस मद से करे ?

बहुगुणा सरकार पर लग रहे खाद्य सामग्री के घोटाले के आरोप भी अब गंभीर हो गये हैं। नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट ने ऋषिकेश की राजा ट्रांसपोर्ट कम्पनी को बिना टेंडर के ही 25 हजार राहत किट की आपूर्ति का ठेका दिये जाने का आरोप लगाया है। भट्ट के अनुसार इस कम्पनी के पास टिन नम्बर, वाणिज्य कर रजिस्ट्रेशन और वैट प्रमाण पत्र भी नहीं हैं, इसके बावजूद चमोली के जिलाधिकारी ने इसके लक्ष्मण झूला स्थित भारतीय स्टेट बैंक के खाते में 21 जुलाय 2013 को 25 लाख रुपये की राशि एडवांस में डाल दी। राहत किट में 5 किलो अरहर दाल, 2 ली. रिफाइंड, 200 ग्राम जीरा विक्टर, 1 किलो टाटा नमक और होम लाइट माचिस के 6 डिब्बे बताये गये हैं। इनका पूर्ण विवरण भी सरकारी कागजों में दर्ज नहीं है। भट्ट का आरोप है कि ऋषिकेश की ही एक अन्य फर्म अग्रवाल ट्रेडर्स को पैकिंग का ठेका दिया गया और एक किट की कीमत 620 रुपय तय की गयी। जबकि बाजार मूल्य के हिसाब से यह सामग्री लगभग 480 रुपये की थी। इस तरह एक किट में 140 रुपये का घोटाला किया गया। इस मामले में यह तथ्य भी सामने आया है कि खाद्य सामग्री के पैकेट की मांग जिलों के स्तर पर थी, लेकिन खाद्य विभाग की क्रय समिति ने ही मनमाने ढंग से ट्रांसपोर्ट का चयन किया। इसकी जानकारी सम्भागीय आयुक्त (आर.एफ.सी.) तक को नहीं दी गयी।

इन आरोपों के बीच ट्रांसपोर्ट कम्पनी के प्रबंध निदेशक संजीव कुमार गोयल ने उत्तरकाशी के प्रभारी डी.एस.ओ. विद्यानाथ शुक्ला और गढ़वाल मंडल विकास निगम के एक निदेशक पर खाद्य सामग्री के भुगतान के एवज में रिश्वत मांगने का आरोप लगाया है। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव एवं प्रमुख सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति को पत्र भेजे हैं। गोयल ने कहा है कि उन्होंने चमोली व उत्तरकाशी के लिये एक करोड़ दस लाख छः हजार रुपये मूल्य के 21,653 खाद्य सामग्री के पैकेट भेजे। लेकिन उन्हें अभी तक केवल 25 लाख का ही भुगतान किया गया है और शेष भुगतान के लिये 25 लाख रुपये रिश्वत मांगी जा रही है।

प्रदेश सरकार ने कथित तौर पर प्रशासनिक जाँच करवा कर किसी भी घपले-घोटाले से इंकार कर दिया है। लेकिन मुख्य सचिव सुभाष कुमार के इस बयान ने मुख्यमंत्री की परेशानी बढ़ा दी है कि खाद्य सामग्री के पैकेट का मूल्य मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के कहने पर ही तय किये गये और मूल्य बाजार में कीमतों के सर्वे के बाद तय किया गया। सरकार का बचाव करते हुए मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि राज्य ट्रांसपोर्ट कम्पनी को फूड पैकेट बनाने का कार्य आपात स्थिति में दिया गया, क्योंकि जिस कम्पनी को पहले आपूर्ति का कार्य दिया गया था वह तय समय में आपूर्ति नहीं कर पायी। विधानसभा के 18 से 20 सितम्बर 2013 तक चले संक्षिप्त सत्र में 20 सितम्बर को मुख्यमंत्री को इस संबंध में भाजपा के आरोपों का जवाब देना था, लेकिन हंगामे के कारण वे जवाब नहीं दे पाये। भाजपा ने स्वयं ही सरकार को बचाव का मौका दे दिया, लेकिन यह तो तय है कि इस मामले में दाल में थोड़ा नहीं बहुत ज्यादा काला है।

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