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    sht November 25, 2009 at 6:36 PM |

    अरुंधती राय ने नक्सलवाद के खिलाफ सरकार द्वारा युद्ध छेड़ने के सम्बन्ध मे आउट लुक मे आलेख मे लिखा है की “युद्ध शुरू हुआ तो तमाम युद्धों की तरह इसकी अपनी गति, तर्क और अर्थशास्त्र विकसित हो जाएगी। यह ज़िंदगी की ऐसी धारा बन जाएगी, जिसका रुख मोड़ना लगभग नामुमकिन होगा।”! यह बात उत्तराखंड मे बंधों के बनने के सम्बन्ध मे अक्षरश सत्य है! बंधों के निर्माण कार्यों ने अपना तर्क, गति और अर्थशास्त्र विकसित कर लिया है ! जिसमे तमाम ठेकेदार नेता और नौकरशाह माफिया व NGO लगातार इसके समर्थन मे काम कर रहे है! और इसका रुख मोड़ना भी कठिन लग रहा है, जब तक १९९४ की तरह बड़ा जनांदोलन जल जंगल जमीन बचाने को नहीं होता है !

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