3 Responses

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    अफ़लातून April 5, 2011 at 3:26 PM |

    शम्भू राणा , इस संस्मरण को पढ़ते हुए कई लोगों को अपनेपन की अनुभूति हो रही होगी।मुझे बांग्लादेश का मुक्ति-संग्राम और आपतकाल याद आया -रत्नाकर भारतीय और कैलाश बुधवार याद आए ।

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    Vivekanand pandey April 7, 2011 at 2:21 PM |

    KAL-AAJ AUR KAL, KHEL KHILARI, JAISI BAHUT SI YADEN JUDI HAIN. PAHLI BAR NEWS KA MATLAB BBC SUNKAR SAMJHA THA. KASH AISA NAHI HOTA.

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    VIJAY SINGH SAHARAN November 11, 2011 at 10:31 PM |

    वाह भाई मज़ा आ गया आपके विचार पढकर .
    मुझे बीबीसी की सभी पुरानी यादें ताज़ा हो आयीं.आपकी इस पोस्ट ने तो मुझे भावुक कर दिया.
    मैंने भी जब बीबीसी के बंद होने का समाचार बीबीसी पर सुना तो दिल बैठ गया.लेकिन मुझे अंत तक लगता रहा की नहीं ये नहीं हो सकता ,जिस दिन ये समाचार आया की बीबीसी जारी रहेगा में जयपुर में था ,मेने अपने एक दोस्त को फोन करके ये बात बताई,लेकिन मुझे लगा रेडियो के लिए ऐसी दीवानगी सब में नहीं होती,मेने फेसबुक पर भी लिखा पर किसी ने कोई विचार व्यक्त नहीं किया…
    बहरहाल आप और हम इस बात से खुश हैं की बीबीसी जिन्दा है…

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