5 Responses

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    घिंघारु October 26, 2010 at 12:39 PM |

    quote- “बाजार से टमाटर के नाम पर टमाटो-प्यूरी भले ही गायब हो गयी, मगर दारू उचित मूल्य पर इफरात से मिलती रही। सरकार को चाहिये कि शराब व्यवसायियों को बुलाकर उनसे आपदा प्रबंधन के गुर सीखे।”

    इन लाइनों पे तो मज्जा आ गया महाराज। वैसे हमें शराब के व्यावसायियों से यही नहीं कई और चीजें भी सीख लेनी चाहिये 😀 😀

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    Vijay Kumar Joshi October 26, 2010 at 5:15 PM |

    शम्भू राणा जी का लेख पढ़ कर अनायास ही अल्मोडा की नराई लग गयी. लेख टिपिकल अल्मोडायी बहाव में लिखा गया है बहुत अच्छा लगा.

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    Chander Mohan October 26, 2010 at 6:29 PM |

    अल्मोडा की त्रासदी किसी कहानी की शक्ल मे कोई आप जैसा पहाडी जीवट वाला ही बयान कर सकता है. काश अल्मोडा के घाव भी हम सहला सकते.

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    harshvardhan verma December 14, 2010 at 8:29 AM |

    rana jee waqai kamaal kaa lekh hai,hameshaa kee tarah badan par rengataa aur beech beech mei katataa huaa.

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    […] न होउुं.. लगातार जानता रहा हूं उन्हें नैनीताल समाचार में उनके व्यंग्यों के जरिए… यह […]

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