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नैनीताल समाचार की स्थापना 15 अगस्त 1977 को हुई थी। यह नैनीताल से निकलने वाला एक पाक्षिक समाचार पत्र है। उत्तराखंड की संस्क़ृति, समाज, और इतिहास का दर्पण है यह समाचार पत्र। इसके शुरुआती दिनों के बारे में जानने के लिये यह पढें। नैनीताल समाचार पिछले बत्तीस वर्षों से निकल रहा उत्तराखण्ड का एक प्रतिनिधि समाचार-विचार पत्र है। हर महीने की एक तथा पन्द्रह तारीख को प्रकाशित होने वाले इस पाक्षिक में उत्तराखंड के इतिहास, समाजशास्त्र, पर्यावरण, राजनीति तथा जनजीवन के विभिन्न आयामों के बारे में सामग्री प्रकाशित होती रहती है।

वर्ष 1977 के सुप्रसिद्ध ‘चिपको आन्दोलन’ से लेकर वर्ष 1994 के ‘उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन’ तक नैनीताल समाचार ने उत्तराखण्ड की जनता की आशाओं-आकांक्षाओं को मुखर अभिव्यक्ति दी है, इसीलिये एक सादा और छोटा समाचार पत्र होने के बावजूद नैनीताल समाचार उत्तराखण्ड का सबसे सम्मानित और विश्वसनीय अखबार है।

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नैनीताल मुद्रण एवं प्रकाशन सहकारी समिति के लिये सचिव हरीश पंत द्वारा राजहंस प्रेस, नैनीताल में मुद्रित एवं प्रकाशित।

सम्पादक: राजीव लोचन साह

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35 Responses

Page 1 of 1
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    Navin Joshi August 22, 2009 at 11:32 AM |

    वाह, अपने प्यारे ” नैनीताल समाचार ” की वेबसाइट देख कर आनन्द आ गया.हैँण्ड कम्पोजिँग और हाफ टोन ब्लाँक के दिनोँ से यहाँ तक का सफर खूब उत्तेज़ना भरा रहा, लोगोँ मेँ ऊर्ज़ा भरता रहा.साइबर युग मेँ भी यह सफर जारी रहे, यही कामना है.
    नवीन जोशी, लखनऊ

    Reply
    1. avatar
      Subodh Juyal October 29, 2016 at 8:03 PM |

      थमती साँसो के अधूरे सपने……
      उत्तराखण्ड की देवभूमि मे देव तो रह जाऐंगे मगर इंसान लुप्त हो जाऐंगे। आज पहाड़ो के गाँव और जंगलो मे भेद कर पाना मुश्किल हो रहा है। सरकार की रिपोर्ट के अनुसार,पहाड़ी गाँव विकसित हो रहें है और वहाँ रहने वाले वासियो के अनुसार, हालत पहले से भी बदतर हो गई। सौलह साल बित जाने के बाद भी, ना सरकार जंगलो को काटने से रोक पाई और ना ही गाँव से पलायन। कितने ही गाँव ना जाने कहाँ खो गए। फिर भी उत्तराखण्ड की सरकार केवल मूक-दर्शक बन के देख रही है। सवाल उठता है, क्यों आज हम वहाँ रहना नही चाहते? क्यों हम अपनी संस्कृति और जन्म-भूमि को भूलते जा रहें है? क्यों हम भी पहाड़ी कहलाने या अपनी भाषा बोलने मे शर्म महसूस करते है? इतनी मात्रा मे भू-संपदा होते हुए भी, क्यों हम उस से दूर भाग रहें है? इस क्यों का जवाब कोई ओर नही देगा। इस का जवाब हम उत्तराखण्ड-वासियो को ढूँढना होगा। इसलिए हम पहाड़ी-सदस्यो की एक टीम बना रहें है। जो पहाड़ी-गाँवो को बचाने के लिए हमारा साथ और सहयोग देंगे। हम उत्तराखण्ड के पिछड़े और लुप्त होते गाँवो तथा देवी स्थानो को बचाने के लिए, वीडीयो डोकोमेनटरी बनाऐंगे। जिसे से हमारी स्थानीय सरकार को गाँव की स्थिति और देश के साथ, दुनिया को पहाड़ो की संस्कृति, भाषा, रीति-रिवाज और पवित्रता का पता लग सके। सभी उत्तराखण्ड वासियो से प्रार्थना है कि वो अपने गाँव, भाषा, जंगल, पहाड़ और हवा के लिए हमारा साथ दे ताकि प्राकृति और उत्तराखण्ड की पीढियाँ अपनी जन्म भूमि को बचाने के साथ, उस पर गर्व कर सकें। पहले पेड़ो बचाने के लिए चिपको आंदोलन किया था। अब पहाड़ो और वहाँ रहने वालो को बचाने के लिए आंदोलन चलना होगा।
      Uttarakhand Village Hindi Documentary – First time in History – Simply Heaven

      https://www.youtube.com/watch?v=tHcFp4a4P-M

      सुबोध जुयाल
      (आध्यात्मिक विशेषज्ञ, भौतिक विज्ञानी और लेखक)
      Mail id-kfpstar8@gmail.com

      Reply
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    Vijay Kumar Joshi August 26, 2009 at 2:54 PM |

    Nainital Samachar ko web per dekh ek ajeeb garv bhari prasannata hui-aap logon ki mehnat safal ho yehe kamna hai.
    V.K. Joshi, Lucknow

    Reply
    1. avatar
      Subodh Juyal October 29, 2016 at 8:04 PM |

      थमती साँसो के अधूरे सपने……
      उत्तराखण्ड की देवभूमि मे देव तो रह जाऐंगे मगर इंसान लुप्त हो जाऐंगे। आज पहाड़ो के गाँव और जंगलो मे भेद कर पाना मुश्किल हो रहा है। सरकार की रिपोर्ट के अनुसार,पहाड़ी गाँव विकसित हो रहें है और वहाँ रहने वाले वासियो के अनुसार, हालत पहले से भी बदतर हो गई। सौलह साल बित जाने के बाद भी, ना सरकार जंगलो को काटने से रोक पाई और ना ही गाँव से पलायन। कितने ही गाँव ना जाने कहाँ खो गए। फिर भी उत्तराखण्ड की सरकार केवल मूक-दर्शक बन के देख रही है। सवाल उठता है, क्यों आज हम वहाँ रहना नही चाहते? क्यों हम अपनी संस्कृति और जन्म-भूमि को भूलते जा रहें है? क्यों हम भी पहाड़ी कहलाने या अपनी भाषा बोलने मे शर्म महसूस करते है? इतनी मात्रा मे भू-संपदा होते हुए भी, क्यों हम उस से दूर भाग रहें है? इस क्यों का जवाब कोई ओर नही देगा। इस का जवाब हम उत्तराखण्ड-वासियो को ढूँढना होगा। इसलिए हम पहाड़ी-सदस्यो की एक टीम बना रहें है। जो पहाड़ी-गाँवो को बचाने के लिए हमारा साथ और सहयोग देंगे। हम उत्तराखण्ड के पिछड़े और लुप्त होते गाँवो तथा देवी स्थानो को बचाने के लिए, वीडीयो डोकोमेनटरी बनाऐंगे। जिसे से हमारी स्थानीय सरकार को गाँव की स्थिति और देश के साथ, दुनिया को पहाड़ो की संस्कृति, भाषा, रीति-रिवाज और पवित्रता का पता लग सके। सभी उत्तराखण्ड वासियो से प्रार्थना है कि वो अपने गाँव, भाषा, जंगल, पहाड़ और हवा के लिए हमारा साथ दे ताकि प्राकृति और उत्तराखण्ड की पीढियाँ अपनी जन्म भूमि को बचाने के साथ, उस पर गर्व कर सकें। पहले पेड़ो बचाने के लिए चिपको आंदोलन किया था। अब पहाड़ो और वहाँ रहने वालो को बचाने के लिए आंदोलन चलना होगा।
      Uttarakhand Village Hindi Documentary – First time in History – Simply Heaven

      https://www.youtube.com/watch?v=tHcFp4a4P-M

      सुबोध जुयाल
      (आध्यात्मिक विशेषज्ञ, भौतिक विज्ञानी और लेखक)
      Mail id-kfpstar8@gmail.com

      Reply
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    Deep Prakash Pant September 4, 2009 at 3:30 PM |

    nainital samachar ko internet par dekhkar bahut achchha lag raha hai.
    web site ki designing kabil-e-tareef hai.is k liye nainital samachar ki team ko badhai.
    Deep Prakash Pant
    Gangolihat
    Pithoragarh

    Reply
  4. avatar
    rohit joshi September 4, 2009 at 3:45 PM |

    नैनीताल समाचार के वैबसाइट संस्करण को देखकर वाकई खुशी हो रही हैं इसका एक फाइदा जो जरूर होना है वह है कि अब नैनीताल समाचार के पुराने आलेखेां को तलाशने के लिए अंकों के बंडल नहीं खंगालने पड़ेंगे। बहरहाल आप सभी को बधाई।
    रोहित जोशी गंगोलीहाट पिथैारागढ़

    Reply
    1. avatar
      hem Upreti September 23, 2009 at 4:08 AM |

      namaskar nainital samachar dekh ke aaj achha lag raha hai. bahut miss karta tha nainital samachar ko, aub paris mai baith ke nainital samachar pad raha hu, abhi bhi yakeen nahe ho raha hai.
      any way best wishes to all nainital samachar team
      keep it up

      with best regards
      Hem Upreti
      Paris
      France

      Reply
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    pankaj pandey September 12, 2009 at 9:49 PM |

    Thanks,apane pyare NAINITAL SAMACHAR ko is roop main dekh kar bahut khusi ho rahi hai.Ye safar youn hi chalta rahe.aap ki mehnat safal ho yehe kamna hai.
    pankaj pandey
    bageshwar.

    Reply
  6. avatar
    pallav September 17, 2009 at 6:41 AM |

    Badhai. Ab tatkal naya ank padh sakta hoon.

    Reply
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    Sanjay Joshi September 17, 2009 at 7:34 AM |

    Priy Rajeevlochan ji aur Nainital Samachaar ke mitron,
    Aap sab ko hardik badhai aur shubkamnain is internet sanskaran ke liye. Ab Nainital Samachaar aur vyapak hoga.
    Shubkaamnain,
    Sanjay Joshi

    Reply
  8. avatar
    आशुतोष उपाध्याय October 4, 2009 at 8:07 PM |

    जिस दौर में पत्रकारिता कारपोरेट व्यावसायिकता की गुलाम हो गयी है, नैनीताल समाचार जैसे सोदेश्य पत्र का साईबर कायाकल्प उम्मीदें जगाता है. क्या ही अच्छा होता हम सब मिल कर एक ऐसा सहकारी प्रयास करते जो जगह जगह से निकल रहे गैर व्यावसायिक अखबारों और पत्रिकाओं के वेब संस्करण उतारने में मदद करता. खैर अच्छी शुरुआत के लिए बधाई. खास तौर पर कर्नाटक जी को, जिनकी मेहनत की बदौलत हम नैनीताल समाचार को नेट पर देख पा रहे हैं.
    आशुतोष उपाध्याय, नई दिल्ली

    Reply
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    keshav bhatt October 13, 2009 at 8:31 PM |

    आपको किन शब्दों से धन्यवाद करूं समझ में नहीं आ रहा। नैनीताल समाचार को आपने जीवंत सा कर दिया। वैब साइट देखी। काफी अच्छी…….काफी अच्छी है। नैनीताल समाचार……वो भी नैट की दुनिया से मुकाबला कर रहा है……. प्राण फूंक दिए आपने तो… हममें भी और नैनीताल समाचार में भी। नैनीताल समाचार से हर कोई आगे निकला और फिर इसे भूलता चला गया। अब कहें भी तो किससे क्या कहें ? भागती दुनियां में पीछे कौन देखता है वास्तव में आपने अपनी कला का बखूबी प्रदर्शन कर हमें एक नई जिंदगी दी है।एक बार फिर से आपका शुक्रिया…..नैनीताल समाचार को जीवंत करने के लिए।

    Reply
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    Prem Bora October 18, 2009 at 10:13 PM |

    Rajeevda nainital samachar ap har mahine mujhe mil hi jata he.ab apne iski website bhi bana di he, jisne bhi apka is mamle me sahyog kiya he me apke sath unka abhari hu. bahut badiya banai gayi he. ab nainital samachar ko yaha pad kar me paper ko bacha sakunga. nainital samachar age bhi bhawisya me aur unnti kare yah shubhkamnaye he.
    pichle ank me uchch siksha ke bare me pada to atyant dukh hua ki uttrakhand k nojawano ka kya hoga.

    Reply
  11. avatar
    Manoj Bhatt October 30, 2009 at 10:25 AM |

    Nainital samachar ka cibarikaran dekh kar geeje khil uthe, lagbhag 20 saal baad pada aur utna hi achcha laga. Naye avtaar ko eMubarak.

    Manoj Bhatt
    Filhaal Bangalore main

    Reply
  12. avatar
    Prem Janmejai October 31, 2009 at 11:46 AM |

    Nainital Samachar, gambeerta ke saath, samajik sarokaroN se judi evam saarthak patrakarita karane wali ek rekhankita karane yogya patrika hai. main bahut dinoN se ise pad raha hun, par aaj man hua ki aapko apani pratkriya se bhi avgat karva dun.
    badhaee
    prem janmejai

    Reply
  13. avatar
    Chandan S Bisht November 11, 2009 at 4:46 PM |

    Nainital Samachar ki website dekhkar bahut achha laga. Seemit sadhanon ke bawzood Pahad ki samasyaon ko nirbheekata se awaaz dene wale samachar patra ko is pragati hetu sadhuwad. Baazarikaran aur satelite channalon ki apsanskritik Ghuspaith ke baawzood Jaagar, Holi, Harela, Ghghutia, Kaafal,Jhoda, Nauli, jaisi viluptpray dharohar ko punarjeevit karne mein aapka koi saani nahin. Aapko bar-bar Dhanyavad. Kripaya web-site par pratikriyayen/chitthi likhane ka prabhandh karen to mere jaise kai aalsi patra lekhak bhi sakriya sahyog denge.

    Reply
  14. avatar
    neeraj December 19, 2009 at 6:51 AM |

    Nainital samachar ki web site ko bahut hi achche se maintain kiya gaya ha hai is baat ka hum sab ko hars hona chahiye. par mai ek baat ko jarur kahana chahunga ki nainital samachar mai yeh hamesa kaha jata hai ki is samachar mai sabhi baato ko saamane sachchayi ke saath rakha jata hai ..yeh baat bilkul thik hai lekin yeh samachar patra ek apani thoos wah majboot pahachhan ek samachar patra ke nate banane mai kabhi poorn roop se saaayad safal nahi raha hai.

    is ke baare mai merapahad.com mai kisi sajjn ne likha ki dehradon se kareeb 250 news paper nikalte hai kayi to sarkari vijyapn ke liye karya karte hai………..is baat ko kaha ja sakata hai parntu sajjn ne in patro ke saath apana patra ko bahut achchha kaha yeh kuchh thik nahi laga ………sarkaari vijgapan lene se kya koi news paper sachchhi khabar nahi chhapta hai yeh to humne kabhi nahi suna parntu s sajjan ke anusaar aisa hai……………….

    kabeer daas ji kadoha bhi thik hi hai.nainital samachar patra apane aap mai saksham hai ki wah bheer mai bhi apani pahachaan bana sakata hai..parntu jaroort hai aatma viswaas ki …na ki kisi aur patrika ko dosh dekar aage barne ki………….

    baki bare aur chhote news paper se koi fark nahi hota hai jaise kabir ji nai kaha hai……..

    बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर
    पंथी को छाया नही, फल लगे अति दूर।………

    neeraj

    Reply
  15. avatar
    jagdish July 17, 2010 at 6:56 PM |

    aap Uttrakhandi album – teri ankhun dekhi jo ki ek biklul naya prayas hai ko kyun nahin nanital samachar main include karte… us main ek gana mile sur mera tumhara ki tarz par hai… jismain bade sare singers ek sath ga rahe hai.

    aapka prayas sarahniya hai..

    – jagdish

    Reply
  16. avatar
    एक निन्दक September 12, 2010 at 5:43 PM |

    इन्टरनेट एडिशन निकावण मजि एतु देर क्य़ले लगूनेर भया तम लोग ,हो? एतु देर मजि खबर बात बासि हैजानेर भै! इन्टरनेट इस्त्माल करछा त् काम मे ढील करण ठीक न्य भै, हो।

    Reply
  17. avatar
    राजेश राज September 14, 2010 at 11:34 AM |

    मान्यवर,
    अब इसे मैं अपना दुर्भाग्य मानता हूँ की मैं अब से पहले न गिर्दा जी को जानता था न वीरेन जी को,
    पर नैनीताल समाचार में गिर्दा जी के प्रति वीरेन जी के लेख को पढ़ते समय लगातार आँखें बहती रही
    और जब पढ़ना बंद किया तो लगा कितना अपना सा था कोई जो खो गया, अगर वीरेन जी तक मेरा प्रणाम और इस मार्मिक लेखन शैली की सजीवता की बधाई पंहुचा सकें तो आभारी रहूँगा . वीरेन जी का mob no उपलब्ध करा कर आप और कृपा कर सकते हैं.
    राजेश राज
    सचिव ,कविलोक, गोरखपुर (उ.प्र)
    09889029396

    Reply
  18. avatar
    Hem Bahuguna December 6, 2010 at 12:08 PM |

    Nainital samachar ka naya roop aaj pahli baar dekha to dil khush ho gaya .bahut pahle mere paas bhi nainital samachar aata tha.kuch samachar bhi tab chape.fir achanak vystta badne se samprk hi chhot gaya.ab khushi hai ki dhardar patrkarita se mulakaat hoti rahegi.
    Hem Chandra Bahuguna
    Lohaghat

    Reply
  19. avatar
    Gopal Singh Negi January 16, 2011 at 2:21 PM |

    Nainital Samachar ko website par dekh kar bahut achha laga. Girda Ji ke bare mai padne ko mila. Khaskar unki Kumauni Holi padkar bahut hee anand aaya. Krupaya Kumauni Baith aur Khadi Holi ki kitab kaha milti hai. batlane ka kasht karen. Dhanyabad.
    Gopal Singh Negi
    Chittorgarh (Rajsthan)

    Reply
  20. avatar
    Puran Fartyal February 12, 2011 at 2:54 PM |

    Hi team thanks for providing Uttarakhand News and culture related notes and wish you all the best……….

    Puran Fartyal

    Network Engineer
    ITBL New Delhi

    Reply
  21. avatar
    संतोष मिश्र August 22, 2011 at 8:30 AM |

    आख़िरकार आपकी मुहिम रंग लायी …..
    दो खम्भों के जर्जर होने पर भी आम आदमी के सपनों की इमारत धराशायी नहीं हुई …..
    क्योंकि तीसरा खम्भे (न्यायपालिका) और चौथे आप …..ने सहारा दिया ….
    स्थानांतरण “अनीति” पर माननीय उच्च न्यायालय की फ़टकार
    आपको – आपके सार्थक प्रयास को सलाम…..
    जय हो ….
    डॉ.सन्तोष मिश्र
    स्याल्दे

    Reply
  22. avatar
    ajay pandey January 5, 2012 at 11:12 AM |

    nanital samachaar ki website dekhkar khushi hui aapne acchi website banai hai

    Reply
  23. avatar
    ajay pandey January 29, 2012 at 2:54 PM |

    uttarakhand ke gaon chitreshwar ki samasya
    uttarakhand ke gaon chitreshwar mein sarkar ko ek adhunik suvidhaon se yukta aspatal banana chahiye

    Reply
  24. avatar
    navin dutt bagouli February 3, 2012 at 1:22 AM |

    बहुत लंबे समय बाद मिला निगोड़ा अपना प्यारा नैनीताल समाचार अच्छा लगा इंटरनेट पर पढ़कर दिल बाक-बाक हो गया, वो सारी तस्वीरें बस इस तरह सामने आने लगी, एक-एक कर नैतीताल समाचार में छपा पहला लेख और फिर चला लंबा सिलसिला, चलो राजीव दा को बधाई जिंदा रखने के लिए, इस थाती को, मुझे दुबारा याद करने के लिए महेश दा को धन्यवाद। मुझ जैसे ना जाने कितने अनगिनत लिखाड़ पैदा किए होंगे तूने रे निगोड़े जो आज तेरी ही बदौलत दो वक्त के नूनतेल का जुगाड़ कर रहे हैं। ससुरी महंगाई के इस दौर में हालांकि एक अखबार निकालना बड़ा मुश्किल काम है फिर भी तू जिंता है। ठीक वैसी ही हालत हो रही है जैसे घर से भागा हुआ एक बेटा अचानक कई साल बाद दिल्ली के एक होटल में काम करता हुआ मिल जाता है, वैसी ही खुशी हो रही है रे नैनीताल समाचार। तू इंटरनेटपर भी पहुंच गया तो बड़ा अच्छा लगा। प्यारे यहां तक पहुंचाने वालों को साधुवाद, जय उत्तराखंड़

    Reply
  25. avatar
    ajay pandey February 6, 2012 at 7:31 PM |

    chitreshwar me vikas
    me nanitaal samachaar ko batana chahta hoon ki uttarakhand ke chitreshwar gaon me ek adhunik suvidhaon se yukta aspatal banana chahiye uttarakhand ke gaon chitreshwar me ek aspatal jarur banana chahiye

    Reply
  26. avatar
    Bhaskar joshi May 9, 2012 at 11:29 AM |

    Dear Sir,

    mujhe aaj Nanital Samachar ko Net pe Dekh kar bahut khusi ho rahi hai , or hum sabhi ke liye ye gurbh ki baat hai . waise mai nanital Samachar dwara Kumau ke kai schools mai chalaye ja rahe niband prtiyogita mai jeet chuka hu tab mujhe 1Year tak Nanital Samachar muft mai padhne ka muka mila is samachaar patrika dwara diya gaya. jo aaj bhi mujhe is patrika ki yaad dilata hai.

    spcialy thanks to Mahes daa and Eswari daa
    Bhaskar Joshi
    Delhi

    Reply
  27. avatar
    asheesh September 17, 2012 at 1:39 PM |

    Dear Rajiv Sir,

    Congratulations & wishes for the news press accomplishments so far.

    Media is one tool that can disclose the REAL REAL behind any fabrics..

    I feel too novice to comment on anything as the paper and your experience in the field is 3-4 years older than my existence but am a part of your community.. a Sah by gene…I feel very few people dare to disclose the real facts.. and some of the stuffs i browsed in your paper definitely show a mettle off juss writing a one…

    U wrote on lake levels- 25yrs down the line.., on mining things…the JCB factor, environment, crime-haldwani etc but how u see the turn after decades gone?? Is it a better Nainital…25 years down or Worse???? AND If data reveals…In 25 years… the number of tourists each year coming nainital has manifolded X X X number of times…and each year rising…than does one looks at the Quantity vs Quality aspects of visitors.. who keep the town intact! & IF act socially responsible. The answer might be with you and few old elites who must have seen green days of nainital..

    Nainital is becoming a remote controlled town by few people in domination.. this domination is doing nothing to restrain external domination trespassing from outside.. and settling in there, few come in TIN SHADES and later built a pakka shelter by manipulating the Supreme Court of Nainital- Nagarpalika.. because its all about business..govt….and politics! Just as at macro India level—–the Ambani’s-Birla-Congress Controls the country and its Prices!….Chronic Capitalism

    I was there last week… In coming days of festive season we shall be seeing lots of Electrification, Lightening etc in and around the whole of mallroads, flats etc but whenever i come there, Its hard to see electricity at my home and same is about water supply.. Its nainital..if I tell u about a village some 150 km towards badrinath where my mom belongs to, the definition punctures of so called ‘’Urjaa Pradesh’’.

    Most of natural springs are being dried up and many national/international projects going on in name of development..from world bank to UNICEF.. i saw a report on funding to Uttarakhand… Can bet..could compete at laughter challenge..when we see the Outcome!

    Thefts in nainital is a common thing now and the 2nd case of worry..is….culture and tradition deterioration.. nothing is happening too right…because the Functionaries are too busy too think out off box, just going at too deep to the grass roots…the rural community…before working inside the box.. cities/towns…becos only than they can decorate their annual reports or CSR, initiatives..

    2 things massively happened in India post 90s….Privatisation & NGO-isation. I talked to few owners in & near nainital running NGOs, None took interest in me.. All are very busy…Occupied in scaling.. Masses or Self?? I doubt! I also left unbothered back to ma business.. But today feeling again to say…If u can start.. Do start a Good NGO… cos they are scarce…and with press in hand, U can make a turnaround..

    kind regards,

    asheesh
    nainital, noida

    Reply
  28. avatar
    Krishna Joshi January 31, 2013 at 7:54 AM |

    पुरानी हिंदी फिल्मों में सुना था एक संवाद अक्सर कि – पापी पेट का सवाल है भाई, वरना अपना घर गांव छोडकर क्यों यहाँ भटकते. आज मुझे भी कुछ ऐसा ही अहसास हो रहा है. आज पहली बार नेट पर समाचार का कोई अंक पढ़ा. नैनीताल में तो समाचार के पन्ने घर पर या समाचार के ऑफिस में ही पलट लेता था. पर मुंबई में!! लेकिन जो शब्दों के साथ जो अपनापन पन्ने पलटने में आता है वो लैपटॉप की स्क्रीन ऊपर नीचे करने में कहाँ पर फिर भी!! कुछ तो है इस परदेश में अपना इस रत के सन्नाटे (?) में. वेसे मुंबई में क्या रात त और क्या दिन!!!!

    Reply
  29. avatar
    dr suresh pant February 22, 2015 at 7:58 PM |

    राजीव भाई, बहुत अच्छा लगा नै. स. का वेब संस्करण. बधाई और शुभकामनाएँ.

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      प्रदीप पांडे February 23, 2015 at 6:38 AM |

      धन्यवाद ,इन्टरनेट संस्करण को अधिक लोगों तक पहुचाने में आपकी सहायता अपेक्षित है.

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    shrikant Ghildiyal March 2, 2016 at 6:36 PM |

    नैनीताल समाचार के विषय में क्या लिखा जाए कम विज्ञापन की वजह से कम टी आर पी, पर जो पढ़े वो धन्य ।
    अब मुख्य बात कुर्मान्चल बैंक ने 20%डिविडेण्ट के बाद पहले 18%फिर इस वर्ष 10% डिवीडेण्ट देकर शेयर धारकों को ठगा या वास्तव में बैंक घाटे में चला गया, बैंक प्रबन्धको को नहीं सोचना होगा क्या,इस बैंक के साथ हमारी प्रतिष्ठा जो जुड़ी है ।
    इस मुद्दे को उठाना क्या सही नहीं ?

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    harish bora July 6, 2016 at 1:50 PM |

    हेल्लो श्रीमान राजीव सर मुझे आपका यह समाचार पत्र बेहद अच्छा लगा और में आपसे एक सहायता चाहता हु मुझे कविताएं लिखना अच्छा लगता ह अगर आप इसमें मेरी सहायता करे तो में आपका सदैव आभारी रहूँगा
    धन्यवाद!

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