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    B P Pande May 22, 2017 at 2:53 PM |

    मैं अर्थशास्त्री नहीं कि चीज़ों के निजीकरण या सरकारीकरण से होने वाले हानि लाभ का सम्यक् एवं तथ्यपरक विश्लेषण कर सकूँ। पर इतना ज़रूर जानता हूँ कि जब भी किसी संस्थान अादि के निजीकरण की बात होती है तब सबसे पहले विरोध उस संस्थान के कर्मियों द्वारा ही किया जाता है। यह भी निर्विवाद है कि किसी भी सेवा का एकाधिकार उपभोक्ता के हित में नहीं होता है। अनुभव यह भी बताता है कि जब भी किसी सेवा का निजीकरण किया गया उससे उपभोक्ता को फ़ायदा ही हुआ है। इसलिये उम्मीद यही की जानी चाहिये कि रेलवे का निजीकरण जनता के हित में ही होगा। परन्तु अधिकांश नेता या मंत्री जिनकी रेलवे मंत्रालय पर लार टपकती है और अन्य निहित स्वार्थी तत्व ऐसा आसानी से होने नहीं देंगे।

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