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    नवीन बगौली February 8, 2012 at 1:56 AM |

    भगत दा का शरीर अब हमें कभी नहीं दिखाई देगा, यह सुन कर ही आंखे जम हो गई, गिर्दा का आघात अभी कम भी नहीं हुआ कि एक वर्ष के भीतर, वाह विधाता तुम क्या साबित करना चाहते हो यह हम नहीं जानते। लेकिन भगत दा के लिए इतना तो कहूंगा, हम लोग भगत दा अपकी कद्र नहीं कर पाए। हमलोग से मायने पूरा नैनीताल समाचार का कुनबा से है। निंदक नियरे राखिए….. कहा गया है। इस पर हमने कभी ध्यान नहीं दिया, उसका कारण था कि भगत दा की जो निंदा थी वो हमारे अति उत्साही कारनामों के कारण थी, जिसे वे हमेशा जोश में होश खोने की बात कहते थे। उसी का परिणाम है कि हम आज तक नैनीताल समाचार को अपने पांवों पर खड़ा नहीं कर पाए, एक टीम ऐसी नहीं बना पाए जो अपनी दालरोटी इसी से सम्मानित तरीके से चला पाए। खैर कहने को बहुत कुछ है, लेकिन अब गिर्दा के बाद जो भगत दा की हमें क्षति हुई है उसकी पूर्ति सायद ही हमारा कुनबा कर पाएगा, या खुदा हमें ताकत दे इस सदमें से उबरने की। भगत दा तुम एक मौन महात्मा थे, तुम सदैव हमारे जीवन में अपनी अमिट जगह पाए हो पाते रहोगे, हम हर पल तुम्हें याद करते हैं, तुम्हें सादर सत-सत श्रद्धंजलि विनयांजलि। नवीन बगौली

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