2 Responses

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    harshvardhan verma September 14, 2010 at 5:05 PM |

    pant jee,is anpadh ne ye kavita aaj padhee.

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    Rajesh October 2, 2010 at 8:28 AM |

    लेकिन अगर बान्ध से पहले पानी छोड़ दिया जाता तो क्या ऋषिकेश और हरिद्वार में ज्यादा तबाही नही होती। मुझे तो टी०एच०डी०सी० द्वारा पानी रोकने कोई ऎसा कारण नजर नही आता सिवाय कोटेश्वर डैम को बचाने और मैदानी क्षेत्र में बाढ़ की भयावहता रोकने के। अगर उस समय पानी छोड़ दिया होता तो यह खा जाता कि पानी छोड़े जाने से बाढ आयी।

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