नौकुचियाताल में पाँचवाँ अंतर्राष्ट्रीय डाक्यूमेंट्री फिल्म फेस्टीवल

नौकुचियाताल में पाँचवाँ अंतर्राष्ट्रीय डाक्यूमेंट्री फिल्म फेस्टीवल

भास्कर उप्रेती भारत में आजादी के बाद सरकार की योजनाओं को बताने के उद्देश्य से डाक्यूमेंट्री फिल्म विधा अस्तित्व में आई, जिससे दर्शकों का जल्दी ही मोहभंग हो गया। फिर कुछ लोगों ने कैमरे का प्रयोग अपना आक्रोश व्यक्त करने के लिए किया। आज डाक्यूमेंट्री फिल्में पॉलिटिकल एक्टिविज्म का एक धारदार औजार बन चुकी हैं। […]

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सम्पादकीय

सम्पादकीय

देश लगातार नाकामयाबियों, बल्कि विघटन की ओर जा रहा है और हम देशवासी हैं कि चैन की वंशी बजा रहे हैं। ऐसा क्यों ? ऐसा इसलिये क्योंकि हमारे दिमाग में यह भर दिया गया है कि जो कुछ हो रहा है, वह सब हमारे भले के लिये है। नोटबन्दी को लें। अधिसंख्य लोगों को यह […]

बहुत बड़े घोटाले का एन. एच.-74

बहुत बड़े घोटाले का एन. एच.-74

रूपेश कुमार सिंह ‘‘तुम्हारे खेत के बीच से होकर गुजर रहा है नेशनल हाइवे-74। रोड़ मैप बन गया है। बस मुआवजा देकर काम शुरू हो जाएगा। तुम्हारे खेत की सीध से जितनी भी जमीन है, यह सब भी ली जाएगी। खेती वाली जमीन पर मुआवजा ज्यादा नहीं मिलेगा। तुम कहो तो मैं 100 के 1000 […]

उत्तराखण्ड में वैकल्पिक राजनीति के लिए एक विमर्श

{हिन्दुस्तान, लखनऊ के सम्पादक पद से सेवानिवृत्त, ‘दावानल’ जैसे उपन्यास के यशस्वी लेखक और आन्दोलनकारी नवीन जोशी की यह टिप्पणी उन सब पाठकों के लिये हैं जो उत्तराखंड के हालातों से बेजार हैं, मगर अभी उम्मीदें नहीं छोड़ बैठे हैं। नवीन का और उनके साथ हम सबका मानना है कि उत्तराखंड की बेहतरी के लिये […]